लखनऊ, जेएनएन। केजीएमयू में ट्रॉमा सेंटर में पूर्व में लगी आग का मामला शनिवार को कार्यपरिषद की बैठक में भी उछला। बैठक में आग लगने को साजिश करार देने वाले डॉक्टर का डिमोशन कर दिया गया। वहीं प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोपों में फंसे चिकित्सक को बरी कर दिया गया। केजीएमयू की कार्यपरिषद की बैठक शनिवार को हुई। 39 एजेंडे रखे गए। 

फार्माकोलॉजी विभाग के प्रो. संजय खत्री को अनुशासनहीनता में डिमोशन करने का फैसला किया गया। उन्होंने अक्टूबर 2017 में ट्रॉमा सेंटर में हुए अग्निकांड को साजिश करार दिया था। एक न्यूज चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में उन्होंने केजीएमयू प्रशासन के कारनामों को उजागर किया था। डॉ.खत्री ने ट्रॉमा सेंटर में आग के जरिए गड़बड़ी के दस्तावेज व सुबूत मिटाने का दावा किया था।

साथ ही संस्थान के प्रशासनिक पद पर काबिज डॉक्टर पर कैंसर की दवा महानगर स्थित एक मेडिकल स्टोर की लिखे जाने का खुलासा किया था। ऐसे में नाराज केजीएमयू प्रशासन ने अनुशासनहीन करार देते हुए मामले पर जांच बैठा दी। शनिवार को कार्यपरिषद ने डॉ. संजय खत्री पर डिमोशन करने की कार्रवाई पर मुहर लगाई। डॉ.खत्री 10 वर्ष पहले प्रोफेसर बने थे। डॉ. आशीष वाखलू को चार्जशीट दी गई।

नए पैटर्न पर एमबीबीएस परीक्षा: केजीएमयू में नए पैटर्न पर एमबीबीएस परीक्षा होगी। एमसीआइ की गाइड लाइन के अनुसार परीक्षा कराने के लिए कार्यपरिषद में मंजूरी प्रदान कर दी गई है।

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Posted By: Divyansh Rastogi

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