नीरज मिश्र, लखनऊ: जीएसटी काउंसिल ने व्यापारियों को माल परिवहन में राहत दी है। यानी इसका दायरा और बढ़ा दिया है। अब पचास किमी. के दौरान माल का परिवहन करने पर ई-वे-बिल डाउनलोड नहीं करना पड़ेगा। पहले यह दूरी दस किमी. ही थी। यही नहीं प्राथमिक जानकारी के लिए माल का विवरण भरे जाने वाले पार्ट-ए के बाद पार्ट-बी भरे जाने की अवधि में भी छूट दी गई है। उसे बढ़ाकर 15 दिन कर दिया गया है। पहले इसमें दाखिले के लिए 72 घंटे का ही मौका था। काउंसिल का यह संशोधन पहली अप्रैल से प्रभावी होगा।

जीएसटी काउंसिल ने एक अहम निर्णय लेते हुए माल परिवहन के दौरान होने वाली दिक्कतों से राहत देते हुए व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों की छूट की सीमा को और बढ़ा दिया है। पहले माल भेजने वाले के स्थान से ट्रांसपोर्टर को, या फिर ट्रांसपोर्टर के यहां से माल पाने वाले को वस्तु परिवहन के दौरान दस किमी. के दायरे में छूट का प्रावधान था।

पार्ट-बी के लिए अब 15 दिन की मोहलत

एक अन्य संशोधन के तहत पार्ट-ए (मूल्य और माल के विवरण संबंधित प्राइमरी जानकारी के लिए प्रयुक्त होने वाला प्रपत्र) के बाद डाउनलोड किए जाने वाले पार्ट-बी (गाड़ी नंबर, स्थान, बिल्टी और ट्रांसपोर्ट की जानकारी वाला प्रपत्र) की समयावधि में भी इजाफा किया गया है। पहले इसे डाउनलोड किये जाने की अवधि 72 घंटे की थी।

बड़ी गाड़ियों में भी छूट

बाइक, कार या अन्य बडे़ सामान लेकर चलने वाले डाइमेंशनल कारगो के लिए प्रतिदिन सौ किमी. चलने की छूट को घटाकर 20 किमी. कर दिया गया है।

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अच्छे संशोधन काउंसिल की ओर से किये गए हैं। इनसे ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी। दस किमी. की छूट बढ़ाकर 50 किमी. की गई है। साथ ही परिवहन के लिए वाहन और बिल्टी संबंधित जानकारी के लिए डाउनलोड किये जाने वाले पार्ट-बी की समयावधि बढ़ाकर 15 दिन की गई है। डाइमेंशनल कारगो के लिए भी बड़ी राहत है। इसे बीस किमी. के दायरे में लाया गया है। पहली अप्रैल से यह प्रभावी होगा।

बीडी द्विवेदी, एडिशनल कमिश्नर वाणिज्यकर

Posted By: Jagran