Deepawali LIVE: उत्तर प्रदेश में दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा, आपके शहर का शुभ मुहुर्त; यहां पढ़ें अपडेट्स
Uttar Pradesh Deepawali LIVE Updates: प्रदेश के विभिन्न शहरों में दीवाली का जश्न, लक्ष्मी गणेश पूजन, दीपावली पूजन दीवाली जश्न का लाइव अपडेट्स

Uttar Pradesh Deepawali LIVE Updates:
उत्तर प्रदेश में दीपावली LIVE अपडेट्स| डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर भारत के प्रमुख त्योहारों में शुमार दीपावली का पर्व आज के ही दिन मनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश में भी दीपावली त्योहार की रौनक घर-घर में छा रही है। इस ब्लॉग में आपको आपके शहर (लखनऊ, आगरा, कानपुर, मेरठ, वाराणसी, प्रयागराज समेत अन्य जिले) के अनुसार दीवाली पूजन, लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहुर्त और महापर्व का उत्सव मनाए जाने के लाइव अपडेट्स दिए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश में दीपावली जश्न की विशेष झलकियां LIVE Updates-
दीपावली पर पटाखों के धुएं और धमाकों से बचें, सेहत का रखें ध्यान
दीपावली पर आतिशबाजी का शोर और पटाखों से निकलने वाला धुआं बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। उन्हें पटाखों के धुएं और तेज धमाकों से दूर रहना चाहिए।
मेडिकल कालेज के फिजीशियन डॉ. कमलेंद्र वर्मा के मुताबिक, पटाखों का धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है। अस्थमा और सांस के रोगियों को इसके सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। धुआं घर में न आए, इसके लिए दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें। संपर्क में आने से खांसी, घबराहट या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत वहां से दूर चले जाएं। सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या चक्कर आने पर अस्पताल जाएं।
महिला रोग विशेषज्ञ डाक्टर सुप्रिया मिश्रा ने बताया कि पटाखों के धुएं में मौजूद बारीक कणों से खांसी, गले में जलन, सांस फूलने और घरघराहट की समस्या हो सकती है। हवा में प्रदूषण कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर भी असर डाल सकता है। बारीक पार्टिकुलेट मैटर सूजन बढ़ाकर ब्लड वेसल के सामान्य काम में बाधा डाल सकते हैं।
गर्भावस्था में दिल और सर्कुलेटरी सिस्टम मां और बढ़ते बच्चे को सहारा देने के लिए पहले से अधिक मेहनत कर रहे होते हैं। ऐसे में इन सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव मां और गर्भस्थ शिशु के लिए ठीक नहीं है। गर्भवती महिलाएं पर्व की खुशियों के बीच अपनी और गर्भस्थ शिशु की सेहत का विशेष ध्यान रखें।
पटाखा छुड़ाते समय यह बरतें सतर्कता
- छोटे बच्चों के साथ घर का कोई बड़ा सदस्य भी साथ में रहे।
- चश्मा लगाकर ही पटाखे छुड़ाएं। कम विस्फोटक क्षमता वाले पटाखे ही छुड़ाएं।
- अपने बच्चों को पटाखे जलाते समय हमेशा कॉटन और फिटिंग वाले कपड़े ही पहनाएं।
- पटाखे जलाते समय बच्चों के पैरों में चप्पल की जगह बंद जूते पहनाएं।
- खुले आसमान के नीचे ही पटाखे जलाएं।
- आसपास कोई ज्वलनशील वस्तु (सूखे पत्ते, घास, लकड़ी, गैस सिलेंडर या वाहन) न हो।
- अपने आसपास पानी की बाल्टी और रेत तैयार रखें।
दीपावली पर आज मोक्ष कल्याणक और बंदी छोड़ दिवस
दीपावली का पर्व रविवार को शहर में रोशनी और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन जैन समाज भगवान महावीर के निर्वाण दिवस को मोक्ष कल्याणक महोत्सव के रूप में मनाएगा, जबकि सिख समाज बंदी छोड़ दिवस के रूप में 52 राजाओं की मुक्ति की ऐतिहासिक घटना को याद करेगा। दूसरी ओर बंगाली समाज में दीपावली की रात मां काली की विशेष पूजा-अर्चना होगी।
कमल के फूल 50 से 70 रुपये जोड़ा

लखीमपुर। पूजन सामग्री की खरीदारी के लिए संकटा देवी फूल बाजार में भी ग्राहक पहुंचे। कमल के फूल, कमल गट्टा और वैजयंती की माला खूब बिकी। फूल विक्रेता तुषार सैनी और शुभम सैनी के मुताबिक, कमल का फूल 50 से 70 रुपये जोड़ा, गेंदे की झालर 40 से 60 रुपये और वैजयंती की माला 70 से 100 रुपये जोड़ा बिकी।
बलरामपुर जिले में गणेश-लक्ष्मी पूजन के लिए मुहूर्त
दीपावली के दिन अमावस्या तिथि और प्रदोष काल का अद्भुत संयोग बन रहा है। इसे गृहस्थों, व्यापारियों और साधना करने वालों के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। दीपावली के दिन प्रदोष काल में गणेश-लक्ष्मी पूजन किया जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथों में दीपावाली पूजन के लिए प्रदोष काल, निशीथ काल और महानिशीथ काल का एक ही तिथि में मिलना सर्वोत्तम माना जाता है, जो कि आठ नवंबर को है।
पंडित बजरंगी प्रसाद के अनुसार, शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक प्रदोष काल और वृषभ लग्न रहेगा। यह समय मां लक्ष्मी और गणेश पूजन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। गणेश-लक्ष्मी पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 5:54 बजे से शाम 7:50 बजे तक रहेगा। व्यापारी वर्ग कारखानों या फैक्ट्री में दिन के समय गणेश-लक्ष्मी पूजन का समय कुंभ लग्न में दोपहर एक बजकर 27 मिनट से दोपहर 02:54 तक रहेगा।
आतिशबाजी करने को लोगों में बेकरारी

प्रकाश पर्व दीपावली पर आतिशबाजी करने को लोगों में बेकरारी देखी जा रही है। सबसे ज्यादा नन्हे-मुन्नों में इसका उत्साह है। दीपावली पर पटाखे खरीदने के लिए लोगों की भीड़ जुटने लगी है। छोटी दीपावली के दिन भी लोगों ने बाजारों में जमकर खरीदारी की।
अमावस के काजल का क्रेज आज भी
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के चलते आधुनिक युग में हुए तमाम परिवर्तनों के बावजूद बाजार में उपलब्ध तरह-तरह के प्रसाधन के साधनों के बाद भी लोगों में अमावस के काजल का क्रेज उतना ही है, जितनी पुरानी यह परम्परा है।
महिलाओं की मानें तो कुम्हारों द्वारा बनाई गई कजराही घंटी में दीपावली के दिन मिट्टी के दिया में तेल के साथ रुई की बाती लगाकर उसे जलाने के बाद निकलने वाले धुएं को कजराही घंटी में रात भर रोककर उसी धुंए के गर्द को तेल में मिलाकर परिवार के सभी सदस्यों की आंखों में प्रसाद की तरह लगाया जाता है।
पूजन की तैयारियों को लेकर बाजारों में भीड़
दीपावली पर भगवान गणपति व माता लक्ष्मी के पूजन की तैयारियों को लेकर बाजारों में भीड़ उमड़ रही है। घर-घर लोग त्योहार मनाने की तैयारियों में जुट गए हैं। घरों की साफ सफाई के साथ खरीददारी तेज हो गई है।
