लखनऊ [रूमा सिन्हा]। करीब बीस लाख वाहन रोजाना लखनऊ की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें डीजल से चलने वाले वाहन भी हैं, जो राजधानी की हवा को लगातार जहरीली बना रहे हैं। विकास के नाम पर पेड़ों की कटान और शहर में चौतरफा अधाधुंध निर्माण और कूड़े निस्तारण को लेकर सरकारी महकमों की उदासीनता भी प्रदूषण को खतरनाक स्तर पर लेकर आ गयी है। 

एअर क्वालिटी इंडेक्स में अगर लखनऊ की हवा देश में सबसे खराब मिली तो उसका प्रमुख कारण खराब नियोजन है। जहरीला धुआं उगलती इकाइयां, निर्माण कार्यों में उड़ती धूल और खुले में जलाया जा रहा कूड़ा इसे और खतरनाक बना रहा है। शहर की आबो-हवा जहरीली हो रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस दिनोंदिन गंभीर होती समस्याओं के तरफ से अनजान बने हुए हैं जिससे सांस लेना दिन पर दिन भारी पड़ता जा रहा है। 

हर तरफ जल रहा कूड़ा

कूड़ा जलाना दंडनीय है बावजूद इसके जगह-जगह कूड़ा जलाया जा रहा है। स्वयं नगर निगम कर्मी कूड़ा जलाते देखे जा सकते हैं। यही नहीं, निगम की डंपिंग साइट घैला पर कूड़े में स्थाई रूप से आग लगी रहती है जिससे जहरीला धुंआ उठता रहता है। घर-घर में एयर कंडीशनर भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। शहर में हर तरफ इमारतों पर सैकड़ों की संख्या में एसी लगे हैं जिनसे निकलने वाली खतरनाक गैस पर्यावरण के साथ-साथ हवा को भी दूषित कर रही है। 

कंक्रीट के जंगल बन रहे समस्या 

हर ओर होते बेतरतीब निर्माण और प्रदूषण का बड़ा कारण बनता जा रहा है। ऐसे ही 10 बड़े निर्माणों को प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने मंगलवार को नोटिस जारी किया है। गोमती बैराज पुल के निर्माण और उसके आसपास रिवर फ्रंट के रुके हुए काम से उड़ता हुआ धूल का गुबार एक बड़े क्षेत्र में वायु प्रदूषण का कारक बना हुआ है। जगह जगह रेत के बड़े टीले हैं। कुडिय़ा घाट से लेकर लामार्टीनियर तक यही हालात हैं। केंद्रीय विष विज्ञान संस्थान (आइआइटीआर) ने हाल ही अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जहां जहां मेट्रो रेल परियोजना के तहत निर्माण कार्य किये जा रहे हैं, वहां वायु प्रदूषण बहुत अधिक है।

ट्रैफिक सिस्टम भी जिम्मेदार

टै्रफिक सिस्टम भी वायु प्रदूषण के लिए कम जिम्मेदार नही हैं। शहर में हर समय जाम की स्थिति रहती है जिसके चलते वाहन घंटो फंसे रहते हैं। जो दूरी पांच मिनट में पूरी करनी चाहिए वह 15 मिनट में हो रही है। 

नहीं बचे पेड़

अधाधुंध कटान के चलते शहर में अब कहीं पर भी हरियाली नजर नहीं आ रही है। जिधर देखिये कंक्रीट के जंगल हैं। विकास के नाम पर काटे गए पेड़ों की वजह से प्रदूषण का स्तर लगातार गिर रहा है।

जनरेटर भी उगल रहे धुआं

शहर में तमाम बड़े होटल, सरकारी कार्यालयों और रेस्टोरेंट में धड़ल्ले से जनरेटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे निकलने वाला धुआं हवा को जहरीली कर रहा है।

प्रदूषण फैलाने पर 22  को नोटिस

स्मॉग और प्रदूषण के चलते राजधानी की 22 बड़ी कंस्ट्रक्शन साइट को भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से नोटिस जारी किये गये हैं। ये तो वे निर्माण हैं जो मुख्य रूप से बड़े हैं। इनके अतिरिक्त गलियों और मुख्य मार्गों से इतर हो रहे राजधानी के हजारों निर्माण बड़े ही बेतरतीब अंदाज में किये जा रहे हैं, जिनसे होने वाला प्रदूषण भी लोगों की सांसों में जहर घोल रहा है।

 

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