लखनऊ, आशीष त्रिवेदी। वे डायबिटीज रोगी जिन्हें इंसुलिन लेनी होती है, उनको एक टेंशन इसे सुरक्षित रखने की भी होती है। खासतौर से वो मरीज जिनके यहां फ्रिज नहीं है या बिजली गायब रहती है। ऐसे रोगियों को 24 प्रतिशत डॉक्टर विशेष मटके में इंसुलिन रखने की सलाह दे रहे हैं।

एसजीपीजीआइ के पूर्व चीफ रेजीडेंट व कंसल्टेंट इंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. अरुण कुमार पांडेय के रिसर्च में यह सच सामने आया है। इसी महीने उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ इंडोक्राइनोलॉजी में अपना रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया। भारत की ओर से इस कांफ्रेंस में प्रस्तुत किया गया यह एकमात्र ओरल रिसर्च पेपर था। यह विश्व में पहला सर्वे है जो डॉक्टरों पर इंसुलिन स्टोरेज के बारे में किया गया है। उप्र. में करीब 188 डायबिटीज के डॉक्टर व फिजीशियन पर यह रिसर्च किया गया।

14 दिन सुरक्षित रहती है इंसुलिन
डॉ. अरुण कुमार पांडेय व आइआइटी के प्रोफेसर अश्विनी ठाकुर ने कहा कि मिट्टी के मटके में इंसुलिन को अधिकतम 14 दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है। आइस बैग, थर्मस फ्लॉक्स में तीन से पांच दिन ही रखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि एक बड़े मटके में छोटा मटका रखा जाता है। बड़े मटके व छोटे मटके के बीच की जगह पर मिट्टी भरते हैं। इस मिट्टी को पानी से गीला करते हैं।

छोटे मटके में इंसुलिन रखते हैं और बड़े मटके को मिट्टी के पात्र से बंद करके उसमें पानी भरते हैं। इससे ठंडक बरकरार रहती है। मटके में मिट्टी वाले स्थान को पानी से गीला किया जाता है। ध्यान रखने की बात यह है कि इंसुलिन में पानी न जाए। डॉ. अरुण ने बताया कि भारत में करीब 33 प्रतिशत लोगों के पास रेफ्रीजिरेटर नहीं है।

Posted By: Anurag Gupta

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