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गोरखपुर-लखनऊ हाईवे पर रोडवेज बस ने डिप्टी रेंजर को रौंदा, अस्पताल ले जाते समय मौत

Published: Thu, 08 Oct 2026 05:02 PM (GMT+05:30)

गोरखपुर-लखनऊ हाईवे पर चकिया मोड़ के पास एक तेज रफ्तार रोडवेज बस ने बाइक सवार डिप्टी रेंजर चंद्र भूषण पासवान ...और पढ़ें

मृतक डिप्टी रेंजर चंद्र भूषण पासवान।

मृतक डिप्टी रेंजर चंद्र भूषण पासवान।

HighLights

  1. गोरखपुर-लखनऊ हाईवे पर रोडवेज बस ने डिप्टी रेंजर को रौंदा।

  2. चंद्र भूषण पासवान की अस्पताल ले जाते समय मौत हुई।

  3. मृतक डिप्टी रेंजर के परिवार में दो नाबालिग बेटियां हैं।

जागरण संवाददाता, सहजनवा। गोरखपुर-लखनऊ हाईवे पर गीडा सेक्टर 26 के पास चकिया मोड़ पर गुरुवार शाम तेज रफ्तार रोडवेज बस ने बाइक सवार डिप्टी रेंजर चंद्र भूषण पासवान को रौंद दिया। हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए।

वनकर्मी और आसपास के लोग तत्काल सीएचसी लेकर पहुंचे। हालत गंभीर देख चिकित्सकों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां पहुंचने पर चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही वन विभाग और परिवार में कोहराम मच गया।

चौरीचौरा थाना क्षेत्र के जोधपुर निवासी 42 वर्षीय चंद्रभूषण पासवान वन विभाग में कार्यरत रहे और सहजनवा रेंज में डिप्टी रेंजर के पद पर तैनात थे। साथ ही सहजनवा बीट के प्रभारी थे। रोज की तरह गुरुवार को भी क्षेत्र में भ्रमण पर निकले थे। करीब तीन बजे बाइक से सीहापार स्थित रेंज कार्यालय लौट रहे थे।

चकिया मोड़ पर हाईवे पार करते समय लखनऊ की ओर से आ रही तेज रफ्तार रोडवेज की तेज रफ्तार बस ने बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि चंद्रभूषण सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

सूचना मिलते ही वन विभाग के कर्मचारी और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। एंबुलेंस से सीएचसी पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल भेजा गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

घटना के बाद चालक बस मौके पर छोड़ भाग गया, जिसके बाद पुलिस कब्जे में ली। चंद्रभूषण माता-पिता के इकलौते पुत्र थे और परिवार में पत्नी और दो नाबालिग बेटियां हैं। मौत की सूचना घर पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई।

दो बेटियों से छिन गया पिता का साया

चंद्रभूषण की दो नाबालिग बेटियां शायद रोज की तरह गुरुवार को भी पिता के घर लौटने का इंतजार कर रही होंगी। उन्हें क्या पता था कि जिस रास्ते से पिता ड्यूटी के बाद लौट रहे हैं, वही रास्ता जिंदगी में कभी नहीं भरने वाला खालीपन छोड़ देगा। हाइवे पर हुए हादसे ने दोनों मासूमों से पिता का साया छीन लिया।

परिवार में चंद्रभूषण ही माता-पिता के इकलौते पुत्र और अपनी बेटियों के सहारे थे। अचानक हुई मौत ने पत्नी और दोनों बेटियों के सामने जीवन की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जिस उम्र में बेटियों को पिता का हाथ थामकर आगे बढ़ना था, उस उम्र में उन्हें पिता की तस्वीर के सहारे जिंदगी काटनी होगी।

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