लखनऊ, जेएनएन। राज्य सरकार ने शहीद होने वाले जवानों के एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने का आदेश दिया है। वहीं बारामुला में ऑपरेशन रक्षक के दौरान शहीद हुए सिपाही हर्षवर्धन सिंह की पत्‍नी कई साल से रोजगार के लिए भटक रही है। जो पेंशन मिलती है उससे दो बच्चों की पढ़ाई ही बमुश्किल हो पाती है। शहीद की पत्‍नी  ने रक्षा मंत्री से रोजगार देने की गुहार लगायी। वहीं प्रदेश भर से आए पूर्व सैनिकों ने अपनी रेजीमेंट के रिकॉर्ड और रक्षा लेखा अधिकारियों के साथ पेंशन विसंगति दूर करने के लिए आवेदन सौंपे।

वर्ष 2005 के दौरान ऑपरेशन रक्षक में शहीद हुए सिपाही हर्षवर्धन सिंह की पत्नी समा देवी के दो बेटे हैं। समा देवी ने कहा कि वह कई साल से भटक रही हैं, लेकिन नौकरी नहीं मिली। वहीं पेंशन की विसंगति को लेकर सेवानिवृत्त सूबेदार हेमराज का कहना है कि सातवें वेतन आयोग में तय हुई पेंशन का पीपीओ नहीं आया। पहले पेंशन 9,429 रुपये थी अब 8,425 रुपये हो गई। सेवानिवृत्त हवलदार दशरथ शर्मा को मेडिकल के आधार पर 20 प्रतिशत डैमेज बोर्ड की पेंशन मिलती थी। पिछले पांच साल से वह भी बंद है। नेवी से सेवानिवृत्त जवान ओम प्रकाश की पेंशन से हर महीने 3,500 रुपये की कटौती हो रही है। पूछने पर बैंक और पेंशन मुख्यालय जानकारी नहीं दे रहे हैं।

बलिया की 79 साल की पाना देवी के पति ब्रिगेड ऑफ गार्ड में थे। उनकी मौत जून में हो गई। अब आधार कार्ड में जन्मतिथि न होने से मुख्यालय पेंशन जारी नहीं कर रहा है। सेवानिवृत्त ऑनरेरी सूबेदार विश्वजीत सिंह का कहना है कि सातवें वेतन आयोग की पेंशन के बाद भी उनकी पेंशन नहीं बढ़ी। विनोद कुमार सिंह ने अपनी बेटी के ससुरालजनों पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया।

Posted By: Anurag Gupta

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