लखनऊ [पुलक त्रिपाठी]। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के प्रयोग से युद्ध भूमि में सेना की राह आसान हो चली है। युद्धपोत हों या अन्य हथियार, युद्ध के दौरान उनमें टेक्निकल खामियों के आने में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अंकुश लगाएगा। इससे सैनिकों की जान बचाने के साथ ही अनहोनी से भी बचा जा सकेगा।

डिफेंस एक्सपो में हिस्सा लेने पहुंची कंपनी के अधिकारी गौरव पिलानिया ने बताया कि भविष्य की जरूरत और संभावनाओं को देखते हुए ही डिफेंस सेक्टर के हथियारों व वाहनों को डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़े जाने की दिशा में काम चल रहा है। इसी मकसद से सैन्य क्षेत्र के हथियारों (जमीनी युद्धपोत), एयरक्राफ्ट पर काम जारी है। इसमें आर्टिलरी गन व सभी तरह के कॉम्बैट वाहनों को भी शामिल किया जा रहा है। 

वाहन या हथियार ऑटोमैटिक सिस्टम, मशीनी विशेषताओं जैसे हाइड्रोलिक लाइन, न्यूमैटिक, इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिक सिस्टम से लैस होते हैं। इसके अलावा कम्युनिकेशन सिस्टम का प्रोटोकॉल भी अहम होता है, जिसे हर वक्त दुरुस्त रखना बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में इतनी अधिक व जटिल मशीनरी तंत्र के कभी भी खराब होने व उसमें तकनीकि खामी आने का सामना करना पड़ सकता है। आपात स्थिति में आई टेक्निकल खामी से जान-माल के खतरे की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए पहले से इन खामियों की जानकारी कर लेना और उस समस्या को दूर कर लेना युद्ध के पूर्व की सफलता मानी जा रही है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस बेहद कारगर साबित हो रहा है। 

इसके तहत हथियारों व वाहनों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के प्रयोग के लिए सेंसर का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाइड्रोलिक सिस्टम की निगरानी, तापमान की निगरानी में भी सेंसर का प्रयोग हो रहा। साथ ही वाइब्रेशन व रिक्वॉयल सेंसर, मशीन विजन सेंसर भी लगाए जा रहें। इन्हीं सेंसरों की मदद से रियल टाइम डेटा जुटाया जाता है। मशीन व वाहन के सभी पाट्र्स से डेटा आने के बाद उसे मशीन के पार्ट की गुणवत्ता के मानक से तुलना कराई जा रही। मशीन लर्निंग के द्वारा की गई प्रोग्रामिंग के अनुसार डिवाइस द्वारा उस पार्ट के मानक को वेरीफाई किया जा रहा। डाटा मैच न करने से तथ्य इस बात की ओर इशारा कर देंगे कि उस हथियार के फलां पार्ट में गड़बड़ी विकसित होने वाली है। इसके चलते उसे तुरंत रिप्लेस करने की दिशा में काम शुरू कर दिया जाता है। विशेषज्ञों का दावा है कि यदि हथियार य वाहन का वह उपकरण मौजूद नहीं है तो इस ओर भी फोकस बनाए रखा जाता है कि वह पार्ट कितने समय के लिए साथ दे सकता है, ताकि उसे उस समय तक इस्तेमाल में लाया जा सके। 

 

Posted By: Anurag Gupta

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