अयोध्या, जेएनएन। छह साल की मासूम से जघन्यता व नृशंस हत्या के मामले में पाक्सो जज अशद अहमद हाशमी ने दुष्कर्मियों संतोष नट पुत्र राम कुमार व मम्मन उर्फ सोनू उर्फ तेजपाल नट पुत्र हरीराम को फांसी की सजा सुनाई है। तीसरे अभियुक्त संतोष पुत्र कमला व इंद्रबहादुर यादव पुत्र व‍िंंदेश्वरी का मामला हाईकोर्ट से स्टे होने के कारण विचाराधीन है। दोनों अपराधियों पर दो लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना भी किया गया है। जुर्माना की रकम पीडि़त के परिवारजन को दी जाएगी। दोनों अपराधियों को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।

वारदात बीकापुर कोतवाली क्षेत्र के भुजई का पुरवा चौरे चंदौली की है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता वीके मौर्य व विनोद उपाध्याय के मुताबिक अपराधियों ने छह साल की मासूम बालिका को 10 रुपये देकर टाफी व बिस्कुट लेकर आने को कहा गया। बालिका इसे लेकर गई तो अपराधियों ने उसे कमरे में बंद कर दुष्कर्म किया और गला घोंट कर मार डाला। लाश को निकट के तालाब में फेंक कर छिपा दिया। वारदात 11 सितंबर 2014 की थी। बालिका के परिवारजन उसकी तलाश करते रहे। कोई पता न चलने पर अगले दिन बीकापुर कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस गुमशुदगी दर्ज कर चुप बैठ गई।

कई दिनों बाद बालिका का शव फूलने पर तालाब में उतराने लगा। इसके बाद पुलिस हरकत में आई। शव के पोस्टमार्टम से दुष्कर्म की बात सामने आई। कोतवाली में अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई। कई दिनों बाद संतोष नट का नाम सामने आया। विवेचक उदयराज ने बालिका व अभियुक्तों के कपड़ों का परीक्षण कराया, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई। संतोष के विरुद्ध आरोप पत्र अदालत भेज दिया गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियुक्त संतोष ने ही अदालत में अर्जी देकर वारदात में शामिल अन्य अभियुक्तों के नाम का भी खुलासा किया। 

भाई विक्षिप्त, परिवार पर बहिष्कार का दंश

संतोष नट व मम्मन उर्फ सोनू उर्फ तेजपाल नट को अदालत से फांसी की सजा खबर उनके गांव भुजई का पुरवा चौरे चंदौली में बिजली की तरह पहुंची तो करीब पांच साल पहले हुई वारदात का दर्द गांव वालों को जेहन में उभर आया। यह परिवार बहिष्कार का दंश झेल रहा है। उसका भाई विक्षिप्त हो चुका है। घर खंडहर में तब्दील हो गया है। उसकी भाभी गांव में उपेक्षित जीवन जीने को मजबूर हैं।

12 सितंबर 2014 को बालिका का शव तालाब से बरामद हुआ था, गांव में काफी तनाव फैला था। पुलिस की चुप्पी से भी गांव वालों में नाराजगी रही। कई दिनों के बाद यह बात सामने आई कि बालिका को आखिरी बार संतोष व उसके दोस्तों के साथ देखा गया था। संतोष व मम्मन ट्रक पर चालक व क्लीनर थे। वारदात के बाद वे ट्रक चलाने के बहाने गायब हो गए। कई दिनों बाद उन्हें पकड़ा गया तो राजफास हुआ। मुकदमे की सुनवाई के दौरान संतोष नट व मम्मन नट का कोई पैराकार नहीं था। सरकार ने उन्हें वाद मित्र के तौर पर अधिवक्ता की मदद उपलब्ध कराई थी। संतोष पुत्र कमला व इंद्रबहादुर यादव ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी का स्टे ले लिया।

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