लखनऊ, जागरण संवाददाता। दैनिक जागरण और यूनिसेफ के साझा अभियान 'लिखना जरूरी है' का तीसरा संस्करण शुरू हो रहा। यह अभियान बच्चों के लिए अभिव्यक्ति का बड़ा मंच है, जहां वह लिखकर अपने मन की बात कहते हैं। यह बच्चों और अभिभावकों के बीच आई दूरी को कम करने की कोशिश भी है। लिखना जरूरी है अभियान संवादहीनता को मिटाकर एक संवदेनशील समाज बनाने का उपक्रम भी है। लिखना जरूरी है अभियान के पिछले दाेनों संस्करणों में बच्चों ने बढ़-चढ़कर इसमें प्रतिभाग किया।

इस बार अभियान के तहत बच्चों को अपने मन की बात कहने का मौका देने के साथ ही उनके रचनात्मक और सृजनात्मक कौशल को मंच देने का भी प्रयास किया जाएगा। लिखना जरूरी है-सीजन तीन की शुरुआत करने के लिए शुक्रवार को दैनिक जागरण कार्यालय में हुई बैठक में प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने अपने विचार रखे। साथ ही स्कूल प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि कोविड के कारण बदले माहौल में उनकी तरफ से किस तरह से विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे। ला मार्टीनियर कॉलेज के शिक्षक डा अमित अवस्थी ने कहा कि बच्चे अंतर्मुखी हो गए हैं। इस कारण से भी लिखना जरूरी है...।

ला मार्टीनियर कॉलेज की हिंदी विभाग की अध्यक्ष रीना यूशिंग ने कहा कि शिक्षक सेतु हैं, जो बच्चों को समाज और देश से जोड़ते हैं। बच्चों को संवाद के लिए प्रेरित करने में शिक्षकों की भूमिका अहम है। नेशनल पीजी कालेज में मनोविज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा नेहाश्री श्रीवास्तवा ने कहा कि एक घंटे की कक्षा में दस मिनट सामान्य चर्चा के लिए रखें। पायनियर मांटेसरी इंटर कालेज एल्डिको शाखा की प्रिंसिपल शर्मिला सिंह ने कहा कि बच्चों के मन में शिक्षकों के लिए डर नहीं होना चाहिए। हमने स्कूल में किचेन गार्डन शुरू किया, वहां साथ काम करने से बच्चों और शिक्षकों के बीच ज्यादा बेहतर जुड़ाव अनुभव किया गया। लखनऊ इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल सीतापुर रोड की प्रिंसिपल माण्डवी त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा पर बहुत काम हो रहा, हमें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी काम करना है। जयपुरिया स्कूल कानपुर रोड की प्रिंसिपल पूनम गौतम के अनुसार बच्चों को मोबाइल की दुनिया से बाहर निकालना जरूरी है।

स्टडी हाल एजुकेशनल फाउंडेशन की प्रतिनिधि तन्मा चतुर्वेदी व शिखा सिंह, विमला कनौजिया, रानी लक्ष्मी बाई मेमोरियल स्कूल चिनहट शाखा की प्रिंसिपल सीता सेठ और इंदिरा नगर शाखा की प्रिंसिपल मंजुला सेठ ने कहा कि अभिव्यक्ति के लिए लिखना जरूरी है। सिटी मांटेसरी स्कूल राजेंद्र नगर की प्रिंसिपल जयाश्री कृष्णन, जागरण पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल उमेश कौल, ब्राइटलैंड स्कूल सीतापुर रोड के मैनेजर रचित मानस के अनुसार बच्चों की अभिव्यक्ति बढ़ाने के लिए लिखने के साथ ही उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना भी जरूरी है। लखनऊ पब्लिक कालेज गोमती नगर की प्रधानाचार्या अनिता चौधरी, सिटी मांटेसरी स्कूल एलडीए शाखा की उप प्रधानाचार्या शिप्रा बाजपेई, जयपुरिया स्कूल गोमती नगर की इनोवेशन हेड अर्चना मिश्रा और जुबिली इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल धीरेंद्र मिश्रा ने इस बात पर सहमति जताई कि हमें स्कूल में ऐसा वातावरण देना चाहिए कि बच्चे अपने मन की बात कह सकें। इस मौके पर यूनिसेफ से सुखपाल मारवाह और शिक्षा अधिकारी रवि राज दायल मौजूद रहे।

पहले सप्ताह की गतिविधि

24 से 30 अक्टूबर             कोविड के दौरान शिक्षा पर प्रभाव और चुनौतियां।

31 अक्टूबर से 13 नवंबर   अकेलापन/दोस्तों एवं स्कूल से दूरी।

14 से 20 नवंबर                मानसिक स्वास्थ्य

21 से 24 नवंबर                भावनात्मक तालमेल

25 नवंबर से चार दिसंबर    भविष्य की पुनर्कल्पना।

स्कूल करा सकते हैं प्रतियोगिताएंः लिखना जरूरी है अभियान के तहत स्कूल अपने स्तर पर बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं भी करा सकते हैं। कक्षा पांच से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए ड्राॅइंग और पेंटिंग प्रतियाेगिता का विषय जलवायु परिवर्तन है। कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए वाद विवाद प्रतियोगिता करा सकते हैं। प्रतियोगिता का विषय डिजिटल दूरी को कम करना और सीखने के संकट को कम करना है। कक्षा सात से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए हिंदी, अंग्रेजी कविता लेखन के साथ ही स्लाेगन लेखन प्रतियाेगिता करा सकते हैं। स्लाेगन राइटिंग का विषय भविष्य की फिर से कल्पना है। स्कूल को 30 नवंबर तक प्रतियोगिता के विजेताओं की सूची उनकी पेंटिंग, कविता और स्लोगन के साथ दैनिक जागरण कार्यालय को भेजना होगा।

Edited By: Vikas Mishra