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    आतंकी हमले के आरोपित बता बुजुर्ग को 5 दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट, खातों में ट्रांसफर करवाए 27 लाख

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 10:25 PM (IST)

    साइबर जालसाज एटीएस और एनआईए अधिकारी बनकर बुजुर्गों को पहलगाम आतंकी हमले में शामिल होने का झांसा देकर ठग रहे हैं। जानकीपुरम के 77 वर्षीय रामशंकर त्रिवेदी को भी इसी तरीके से फंसाया गया। उन्हें पाँच दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर जालसाजों ने 27 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।    

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    जागरण संवाददाता, लखनऊ। साइबर जालसाज खुद को एटीएस और एनआइए अधिकारी बताकर पहलगाम आतंकी हमले में शामिल होने की बात कहते हुए बुजुर्गों को जाल में फंसा रहे हैं। इसी तरह जानकीपुरम निवासी बुजुर्ग को फंसाया। पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखने के दौरान 27 लाख रुपये ऐंठ लिए। पीड़ित बुजुर्ग ने साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। जानकीपुरम के सेक्टर-एफ निवासी 77 वर्षीय रामशंकर त्रिवेदी ने बताया कि सात नवंबर की दोपहर करीब 2: 43 बजे उनके पास वाट्सएप काल आई।

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    फोनकर्ता ने खुद को एंटी टेरेरिस्ट स्क्वायड (एटीएस) अधिकारी बताया। कहा कि पहलगाम आतंकी हमले की साजिश में आप भी शामिल हैं। आपने आतंकियों को 70 करोड़ पहुंचाए हैं, जिसमें आपको 70 लाख रुपये कमीशन मिला है। आप आतंकी हमले में साजिशकर्ता हैं। यह सुनकर वह डर गए। उन्होंने इन आरोपों से इन्कार किया तो उन्हें डपट दिया गया।

    पीड़ित ने काल काट दी। इसके बाद उनके पास वीडियो काल आई। काल पर वर्दी पहने अधिकारी ने खुद को एनआइए अधिकारी बताया। धमकाया कि आतंकी हमले की साजिश की रकम आपके खाते में भेजी गई है। धमकाया गया कि जांच के तहत देशद्रोही को गिरफ्तार किया जाएगा, चाहकर भी भाग नहीं पाओगे।

    सर्विलांस के माध्यम से रखी जा रही नजर

    सर्विलांस के माध्यम से नजर रखी जा रही है। पीड़ित रामशंकर ने बोला कि उनके पास कोई रकम नहीं आई थी। इसपर कथित अधिकारियों ने जांच की बात कही। बोला कि खाते की जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा। अगर गलती नहीं मिलेगी तो सारी रकम वापस कर क्लीनचिट दी जाएगी। हालांकि, इस दौरान आपको किसी से कुछ भी बताना नहीं होगा। अगर किसी को कुछ बताया तो गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    फिर सारा बुढ़ापा सलाखों के पीछे ही कटेगा। तीन दिन डराने धमकाने के बाद जालसाजों ने उन्हें दो बैंक खाते दिए और उस पर 27 लाख रुपये जमा करने को कहा। पीड़ित ने 10 नवंबर को 10 लाख और 11 नवंबर को 17 लाख रुपये आरटीजीएस कर दिए। इसके बाद जालसाजों की और डिमांड बढ़ने लगी। आशंका होने पर फोन काटा।

    पीड़ित रामशंकर ने परिवारवालों को आपबीती बताई तो पता चला कि साइबर जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट किया था। इसके बाद उन्होंने हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। साइबर थाने में तहरीर दी। इंस्पेक्टर ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। जालसाजों ने दो बैंक खातों में रुपये मंगाए थे। खाते फ्रीज करने की प्रक्रिया की जा रही है।