लखनऊ, जेएनएन। अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत के न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार यादव ने सीबीआइ को आदेश दिया है कि वह 19 मई को अदालत को बताएं कि गवाहों से जिरह के लिए उनको किस स्थान पर सुरक्षित ढंग से उपस्थित कराएगी। अदालत ने बचाव पक्ष की अॢजयों को 15 मई को स्वीकार करते हुए गवाह जगत बहादुर अग्रवाल, मधुरिमा मिश्रा और फरहत अब्बास से सूक्ष्म जिरह करने की अनुमति प्रदान की थी।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि वीडियो कांफ्रेंसिंग का सिस्टम लगाने के संबंध में मुख्य सचिव को पत्र लिखा गया था, परंतु उधर से कोई सूचना नहीं दी गई है। लिहाजा, स्मारक पत्र लिखा जाए। अदालत ने गवाह मधुरिमा मिश्रा के लिए 20 मई, फरहत अब्बास की 21 मई और बहादुर अग्रवाल की 22 मई को गवाही के लिए सुरक्षित उपस्थिति सुनिश्चित कराने का आदेश दिया है।

यह भी कहा है कि यदि सीबीआइ इन गवाहों को अदालत के समक्ष गवाही के लिए प्रस्तुत करना चाहती है तो हाई कोर्ट एवं राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुरूप निर्धारित तारीखों पर गवाहों को पेश कर सकती है। सीबीआइ की ओर से पैरवी के लिए विशेष लोक अभियोजक ललित कुमार सिंह एवं आरके यादव उपस्थित थे। अदालत ने सीबीआइ से कहा है कि गवाहों की गवाही के तुरंत बाद सभी 32 आरोपितों (धारा 313 द.प्र.स. के अंतर्गत) का बयान दर्ज किया जाना है। इन बयानों की संख्या एक हजार से ज्यादा है।

ऐसी स्थिति में सीबीआइ 22 मई तक प्रत्येक दशा में न्यायालय को रूपरेखा बनाकर सूचित करे कि अभियुक्तों का बयान वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अंकित किए जाने के लिए उनकी सुरक्षित उपस्थिति कैसे सुनिश्चित करेगी। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से पूछे जाने वाले संभावित प्रश्नों की सूची भी अदालत में दाखिल कर दी गई है। मुकदमे की सुनवाई 31 अगस्त तक समाप्त की जानी है। 

Posted By: Anurag Gupta

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