पूर्व सांसद बाहुबली धनंजय सिंह का करीबी है प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप सिंडिकेट का सदस्य अमित टाटा
Mafia Connection in Banned Codeine Cough Syrup Syndicate: स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) भी लखनऊ से गिरफ्तार अमित सिंह उर्फ अमित टाटा को पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही, बीते दिनों सहारनपुर से पकड़े गए विभोर राणा और विशाल सिंह को भी पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा।

जौनपुर के पूर्व सांसद और बाहुबली धनंजय सिंह (बाएं) के साथ अमित सिंह टाटा। स्रोत : इंटरनेट मीडिया
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ : कोडीन युक्त सीरप के अवैध कारोबार में दुकानदार से लेकर सफेदपोश तक की भूमिका है। यह काला कारोबार पूर्वंचाल के कई बाहुबलियों के संरक्षण में फल-फूल रहा था। प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप सिंडिकेट से पूर्व सांसद बाहुबली धनंजय सिंह का कनेक्शन भी सामने आया है।
जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए और गहनता से छानबीन कर रही हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग ने वाराणसी के दवा के फुटकर कारोबारियों से लेकर रांची के सुपर स्टाकिस्ट शैली ट्रेडर्स तक खरीद-फरोख्त की पूरी चेन को खंगाला है। एफएसडीए के अधिकारियों की टीम ने रांची से सीरप की खरीद से जुड़े मेडिकल स्टोर्स के दस्तावेज कब्जे में लिए हैं। इसके बाद प्रदेश में कोडीन युक्त सीरप के अवैध बिक्री के कारोबार की जड़ें खंगालनी शुरू की गई हैं।
स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) भी लखनऊ से गिरफ्तार अमित सिंह उर्फ अमित टाटा को पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही, बीते दिनों सहारनपुर से पकड़े गए विभोर राणा और विशाल सिंह को भी पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा। एसटीएफ तीनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी, ताकि इस नेटवर्क से जुड़े बड़ों तक पहुंचा जा सके।
मामले के मास्टरमाइंड वाराणसी निवासी शुभम जायसवाल तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। उसके दुबई भाग निकलने की आशंका है। सूत्रों का कहना है कि अमित टाटा व शुभम बेहद करीबी रहे हैं और दोनों पूर्व में कई बार एक-साथ दुबई की यात्राएं भी कर चुके हैं। इससे शुभम के दुबई में होने की आशंका और गहरा गई है। गाजियाबाद पुलिस ने शुभम जायसवाल के विरुद्ध लुक आउट सर्कुलर भी जारी कराया है। अमित टाटा पूर्व सांसद बाहुबली धनंजय सिंह का भी करीबी है।
एफएसडीए के एक अधिकारी के अनुसार शैली ट्रेडर्स एबाट हेल्थ केयर कंपनी का सुपर स्टाकिस्ट है। रांची के औषधि विभाग के अधिकारियों से शैली ट्रेडर्स से कोडीन युक्त सीरप लेने वाले वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, प्रयागराज, सुलतानपुर व अन्य जिलों के मेडिकल स्टोर्स की जानकारी इकट्ठा की गई है। इसमें ही वाराणसी मंडल और आसपास के जिलों के 93 से अधिक मेडिकल स्टोर को कोडीन युक्त सीरप भेजने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद एफएसडीए आयुक्त रोशन जैकब के नेतृत्व में 12 से 14 नवंबर तक हुई जांच में पूरे अवैध नेटवर्क को खंगाला गया। जांच में पता चला कि नशे के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सीरप के अवैध कारोबार के रैकेट में पूर्वांचल के कई सफेदपोश भी शामिल हैं। इससे एफएसडीए ने पूरी सावधानी बरतते हुए इनके खिलाफ भी सबूत इकट्ठे करके कार्रवाई आगे बढ़ाई।
एफएसडीए के अनुसार शैली ट्रेडर्स ने वर्ष 2023 से 2025 तक फेंसेडिल सीरप की 89 लाख शीशियां खरीदी थीं। इसमें से 84 लाख शीशियां वाराणसी मंडल के 93 मेडिकल स्टोर को भेजना दिखाया गया। वाराणसी की सृष्टि फार्मा, जीटी इंटरप्राइजेज, शिवम फार्मा, हर्ष फार्मा, डीएसए फार्मा, महाकाल मेडिकल स्टोर, निशांत फार्मा, वीपीएस मेडिकल एजेंसी और श्री बालाजी मेडिकल बंद थीं।
डीएसए फार्मा और महाकाल मेडिकल केवल कोडीन युक्त दवाओं की अवैध खरीद और बिक्री कर रहे थे। मेसर्स जीडी इंटरप्राइजेज ने सीरप की 2.14 लाख शीशियां खरीदीं, लेकिन बिक्री का रिकार्ड उनके पास नहीं था। न्यू पीएल फार्मा ने सीरप की 2.16 लाख शीशियां बंद फर्म श्री बालाजी मेडिकल को बेचना दिखाया। ड्रग कंट्रोलर शशि मोहन का कहना है कि इन सभी के साथ ही 87 फर्मों पर एफआइआर कराई जा चुकी है। अभी अन्य की जांच जारी है। इसमें कई सफेदपोशों के भी शामिल होने की जानकारी मिली है। इसे एसटीएफ के साथ साझा किया रहा है।
राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटा था अमित सिंह ‘टाटा’
कोडिनयुक्त कफ सीरप की तस्करी मामले में एसटीएफ के हत्थे चढ़ा अमित सिंह ‘टाटा’ राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटा था। वह जौनपुर के रामपुर ब्लाक से प्रमुख का चुनाव लड़ने की योजना बना रहा था। अमित टाटा ने कुछ वर्ष पहले ठेकेदारी का काम लेना शुरू किया तो चुनौतियां मिलने लगीं। वर्चस्व की लड़ाई जीतने के लिए उसने सफेदपोशों से साठगांठ शुरू की। इस दौरान उसकी करीबी जौनपुर के सांसद रहे बाहुबली धनंजय सिंह के साथ हो गई। धनंजय ने भी कई अवसरों पर टाटा को अपना करीबी बता दिया। लखनऊ में उसकी गिरफ्तारी के बाद वाराणसी में कफ सीरप तस्करी की जांच कर रही एसआइटी भी उसके खिलाफ सुबूत जुटा रही है। डीसीपी क्राइम व एसआइटी अध्यक्ष सरवणन टी. ने कहा कि अमित टाटा ने अपने पिता के नाम से दवा की दो फर्में बनाई हैं। इनका पता लगाया जा रहा है। जौनपुर के सुरेरी के सीठूपुर गांव निवासी (हाल पता बृजइंक्लेव, वाराणसी) अमित टाटा के खिलाफ कुल सात मुकदमे दर्ज हैं। इनमें छह मुकदमे बनारस और एक लखनऊ में दर्ज है। इनमें तीन मामलों चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, एक मामले की जांच चल रही है और दो मामलों में फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है।
पिछले दिनों अमित सिंह की मौजूदगी में कफ सीरप तस्करी गिरोह का सरगना शुभम जायसवाल एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर रहा था, इसका वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ था। अमित टाटा के खिलाफ पहला मुकदमा कैंट पुलिस ने 2009 में सरकारी सेवक को धमकाने, रंगदारी मांगने, तोड़फोड़ समेत पांच धाराओं में दर्ज किया था। इसकी जांच पूरी भी नहीं हो पाई कि कैंट पुलिस ने अमित के खिलाफ गैंग्स्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया। हालांकि हाई कोर्ट के आदेश पर इस मामले में आगे की कार्रवाई नहीं हो पाई। 2014 में सारनाथ पुलिस ने जानलेवा हमला समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया। इस मामले में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट भी लगा दी है। 2023 में जानलेवा हमला, धमकी देने का केस दर्ज हुआ। इसमें भी फाइनल रिपोर्ट लगाई जा चुकी है। 2015 में खुशहाल नगर के अनिल कुमार सिंह ने जमीन का मालिकाना हक बनाकर उसे बेचने का केस दर्ज कराया। इस बारे में पूछने पर उन्हें गालियां और जान से मारने की धमकी दी गई। मामले की जांच में पुलिस ने जार्चशीट दाखिल की। 2016 में कैंट पुलिस ने देसी पिस्टल लेकर घूमने का केस दर्ज किया, जिसकी जांच में चार्जशीट लगाई गई। 2021 में चौबेपुर के राजा आनंद ज्योति सिंह (अब दिवंगत) ने जबरन वसूली समेत कई धाराओं में केस दर्ज कराए जिसमें पुलिस ने चार्जशीट दाखिल किया। इस साल राजातालाब के बभनियांव निवासी विकास सिंह ने अमित टाटा समेत चार के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का प्रयास आदि में केस दर्ज कराया।
रांची की शैली ट्रेडर्स ने खरीदी सीरप की 89 लाख शीशियां
एफएसडीए के अनुसार शैली ट्रेडर्स ने वर्ष 2023 से 2025 तक फेंसेडिल सीरप की 89 लाख शीशियां खरीदी थीं। इसमें से 84 लाख शीशियां वाराणसी मंडल के 93 मेडिकल स्टोर को भेजना दिखाया गया। वाराणसी की डीएसए फार्मा और महाकाल मेडिकल केवल कोडीन युक्त दवाओं की अवैध खरीद और बिक्री कर रहे थे।
मेसर्स जीडी इंटरप्राइजेज ने सीरप की 2.14 लाख शीशियां खरीदीं, लेकिन बिक्री का रिकार्ड उनके पास नहीं था। न्यू पीएल फार्मा ने सीरप की 2.16 लाख शीशियां बंद फर्म श्री बालाजी मेडिकल को बेचना दिखाया। ड्रग कंट्रोलर शशि मोहन का कहना है कि इन सभी के साथ ही 87 फर्मों पर एफआइआर कराई जा चुकी है।

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