लखनऊ, जेएनएन। चारबाग रेलवे स्टेशन पर आने वाली ट्रेनों के प्रवासी श्रमिकों का निश्शुल्क सामान उठाने और उनको खाना पानी बांटने में मदद करने वाले 80 साल के कुली मुजीबुल्ला की प्रशंसा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने की। उन्होंने मुजीबुल्ला को एक प्रशंसा पत्र भी भेजा। यह प्रशंसा पत्र कांग्रेस के पदाधिकारियों ने शनिवार को चारबाग स्टेशन पर जाकर मुजीबुल्ला को सौंपा और फूल की माला पहनाकर सम्मानित किया।

प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने पत्र में लिखा कि 'आपके बारे में जानकर बहुत खुशी हुई कि आप कोरोना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन में रेल यात्रियों की निश्शुल्क सेवा कर रहे हैं। इस महामारी के खत्म होने के बाद जब भी इस दौर को याद किया जाएगा। आपके योगदान को देश कृतज्ञता से याद करेगा। हम ऐसे ही व्यक्तिगत और सामूहिक योगदानों से कोरोना को हराने में कामयाब होंगे। आपकी सेवा भाव को सलाम। 

भूखे प्यासे प्रवासियों की मदद कर रहे अस्सी साल के मुजीबुल्ला

चारबाग स्टेशन के प्लेटफार्म दो पर गुजरात के नौसारी से आयी श्रमिक स्पेशल ट्रेन के रुकते ही अस्सी साल के मुजीबुल्ला भूखे प्रवासियों को केला बांटने दौड़ पड़ते हैं। ट्राली से केला उठाना और छोटे बच्चे, महिलाएं और जरूरतमंदों को पहुंचाने में उनकी तेजी देखती ही बनती है। अब सीने पर बिल्ला नंबर 16 और लाल वर्दी देख बहराइच निवासी विश्वजीत रुक जाते हैं। उनके साथ वृद्ध पत्नी, बेटी और छोटे बच्चें के साथ बहुत सामान रहता है। परेशान विश्वजीत को देख मुजीबुल्ला बोल पड़ते हैं क्या मैं अापकी मदद कर दूं। विश्वजीत बोले पैसे क्या लेंगे। मुजीबुल्ला बोल पड़ते हैं ऊपर वाले को मूंह दिखाना है। यदि आपसे अभी इस बोझ का पैसा ले लिया तो वो कभी माफ नहीं करेगा। देखते ही देखते मुजीबुल्ला करीब 60 किलो भार के बैग उठाकर स्टेशन के बाहर निकल पड़ते हैं।

करीब 50 साल से चारबाग स्टेशन पर याित्रयों का बोझ उठाने वाले मुजीबुल्ला के कंधे अब मजबूरों का सहारा बन रहे हैं। लखनऊ आने वाले प्रवासियों को रेलवे के स्टाल से केला व खाना उठाकर खुद ही बोगियों तक पहुंचाना और जरूरत पड़े तो भारी भरकम सामान उठाकर प्रवासियों के दर्द को हल्का कर देना। यहीं आजकल मुजीबुल्ला की दिनचर्या है।

नेता आज भी ढूंढते हैं बिल्ला नंबर 16 

बिल्ला नंबर 16 उनके पिता बिफई को मिला था। पिता बिफई अंग्रेजाें के समय से चारबाग स्टेशन पर सामान उठाते थे। मुजीबुल्ला बताते हैं कि जब पिता का देहांत 90 साल की उम्र  1970 में हुआ तो कुली का काम करते थे। सिविल डिफेंस के सेक्टर वार्डन मुजीबुल्ला ने तब पिता का बिल्ला संभाला। उनकी एक बेटी और दामाद है जो दो नातिन के साथ रहते हैं। मुजीबुल्ला की धारा प्रवाह अंग्रेजी भी देखते ही बनती है। बोलते हैं कि पिता से विरासत में याित्रयों का बोझ उठाने का काम मिला। अब लॉकडाउन में ट्रेनें भले नहीं हैं। लेकिन जब भी किसी मजबूर को देखता हूं तो मेरे बाजूओं से रहा नहीं जाता। समय से खाना और बेफिक्र होकर सोना यहीं मेरे फिटनेस का राज है। मुजीबुल्ला कहते हैं कि कई बड़े नेता उनको आज भी ढूंढते हैं। कहते हैं कि बिल्ला नंबर 16 कहां है। मैं उनको तब लखनऊ मेल पर जरूर मिलता था। अब यह ट्रेन छोटी लाइन चली गयी।

Posted By: Anurag Gupta

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