लखनऊ, जागरण संवाददाता। ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से नहीं हो रही सफाई के खेल से परदा फिर हटा है। कई जगहों पर सफाई कर्मचारी गायब मिले, जबकि इन कर्मचारियों का मानदेय ठेकेदार को दिया जा रहा था। सïफाई कर्मचारियों की उपस्थिति भी दर्ज हो रही थी। सफाई कर्मचारियों की तैनाती का यह खेल नगर निगम के जोन छह में चल रहा था। दो दिन पूर्व ही जोन आठ में भी दो सौ सफाई कर्मचारियों की तैनाती का घपला पकड़ा गया था। हर दिन एक सफाई कर्मचारी का मानदेय 308 रुपये है। 

सफाई कर्मचारियों की तैनाती में घालमेल और मानदेय के घपले से जुड़े मामले को नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी ने मंगलवार को पकड़ा है। बुद्धेश्वर चौराहे से दुबग्गा की तरफ जाने वाली रोड पर काफी गंदगी और गोबर के ढेर पाए गए थे। इस सड़क की सफाई का जिम्मा मेसर्स आर्यन ग्रुप को दिया गया था। इसके लिए 89 सफाई कर्मचारियों की तैनाती नगर निगम ने की थी और इतने ही सफाई कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान हो रहा था, जबकि मौके पर नौ सफाई कर्मचारी ही काम करते पाए गए थे। नगर आयुक्त ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिया कि मेसर्स आर्यन ग्रुप को सफाई कार्य से तत्काल मुक्त कर दिया जाए।

निरीक्षण के दौरान सड़कों पर कूड़ा, मलबा और अतिक्रमण पाया और जोनल अधिकारी छह को तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए गए। बुद्धेश्वर चौराहे से मोहान रोड के बीच भी चारों तरफ गंदगी पाए जाने पर सफाई कार्य देख रही मेसर्स बालाजी के संचालक पर पचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसी तरह दीनदयाल खदरा रोड पर ढाल मजार के पास गंदगी पाई गई। यहां मजार के पास सफाई ठेकेदार गुड्डू ने भारी मात्रा में मलबा और कूड़ा डाला गया। नगर आयुक्त ने ठेकेदार गुड्डू पर पचास हजार का जुर्माना लगाया है।

Edited By: Vikas Mishra