लखनऊ (जेएनएन)। कैराना लोकसभा व नूरपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में अपने दमखम को आजमाने के बजाए कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी को मात देने के लिए सपा व रालोद प्रत्याशियों को समर्थन देगी। इसकी औपचारिक घोषणा मंगलवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी व प्रभारी महासचिव गुलामनबी आजाद के कर्नाटक से लौटने के बाद संभव है। राष्ट्रीय नेतृत्व के रवैये से स्थानीय कार्यकर्ताओं में मायूसी बढ़ी है।

प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर का कहना है कि कांग्रेस का उद्देश्य भाजपा की निरंकुशता पर अंकुश लगाना है। कैराना और नूरपुर से ही वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दिशा भी तय होगी। उन्होंने गत विधानसभा चुनाव के परिणामों का हवाला देते हुए बताया कि कैराना संसदीय क्षेत्र में आने वाली विधानसभा सीटों में तीन स्थानों पर कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही थी और ढाई लाख से अधिक वोट भी मिले थे।

असंतोष पड़ेगा भारी : उपचुनाव में नहीं उतरने के फैसले से स्थानीय कार्यकर्ताओं में मायूसी है। सबसे अधिक दुविधा प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद के सामने है। हसन परिवार से उनका छत्तीस का आंकडा किसी से छिपा नहीं है। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्हें हराने के लिए प्रचार करने वालों का साथ देना आसान नहीं होगा परंतु पार्टी कोई फैसला करेगी तो सम्मान रखा जाएगा।

उधर, बिजनौर जिले के नूरपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए स्थानीय जिला इकाई प्रत्याशी का नाम फाइनल कर चुकी थी और राष्ट्रीय नेतृत्व को पत्र लिखकर जानकारी भी दे दी गयी थी। इसके बाद शीर्ष स्तर से हरी झंडी नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं में मायूसी है। एक पूर्व विधायक का कहना है कि चुनाव से भागने पर स्थानीय संगठन और अधिक कमजोर होगा। इसका नुकसान आने वाले दिनों में कांग्रेस को झेलना ही होगा।

 

Posted By: Ashish Mishra