लखनऊ, जेएनएन। लोकसभा चुनाव में अकेले मैदान में उतरने को लाभदायक मान रही कांग्रेस को उम्मीद है कि तेजी से बदलते सियासी हालात में पार्टी वर्ष 2009 जैसा प्रदर्शन करने में सफल रहेगी। बहुत कम सीटें लेकर गठबंधन को संगठन विरोधी बताते हुए अपने दम पर या छोटे दलों को साथ में लेकर लडऩा बेहतर माना जा रहा है। पूर्व विधायक सिराज मेंहदी कहते हैं कि केंद्र की सरकार बदलने की स्थिति में कांग्रेस ही है। वर्ष 2009 में अकेले लोकसभा चुनाव लड़ी कांग्रेस अपने 21 सांसद जिताने में कामयाब रही थी। 

रायबरेली-अमेठी छोडऩा मजबूरी

सपा-बसपा गठबंधन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सीट अमेठी और सोनिया गांधी के क्षेत्र रायबरेली पर उम्मीदवार नहीं उतारेगा। उक्त सीटों पर वाक-ओवर को रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है ताकि चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस से मेल का रास्ता भी बना रहे।

रालोद को बुलावा नहीं

भाजपा विरोधी गठबंधन की भूमिका तैयार कर रही बसपा और सपा ने पत्रकार वार्ता में रालोद को शामिल करना मुनासिब नहीं समझा, जिसके चलते जयंत चौधरी ने शनिवार को लखनऊ में पूर्व निर्धारित किसान पुत्र बाईक रैली कार्यक्रम में आना भी टाल दिया। 

सीटों पर फंसा पेंच

उपचुनाव में कैराना सीट भाजपा से छीनने के बाद से रालोद के हौंसले बुलंद हैं, इसलिए पांच अन्य सीटों पर दावेदारी जता रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष डॉ.मसूद अहमद का कहना है कि मथुरा, बागपत, मुजफ्फरनगर, हाथरस और अमरोहा जैसी सीटों पर रालोद को साथ में लिए बिना भाजपा को रोक पाना संभव नहीं। सूत्रों का कहना है कि बसपा रालोद को दो से अधिक सीटें देने को राजी नहीं है।

अकेले लडऩे को तैयार : राजबब्बर

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर का कहना है कि पार्टी गठबंधन के लिए तैयार थी लेकिन, अनुकूल स्थिति नहीं बनी तो अकेले लडऩे को भी कमर कस ली है।

सीटों पर कोई बात नहीं : अजित

रालोद अध्यक्ष अजित सिंह ने शनिवार को लखनऊ में सपा-बसपा की पत्रकार वार्ता की कोई जानकारी न होने की बात कही हैं। उन्होंने कहा कि हम गठबंधन के लिए तैयार हैं। वार्ताएं भी हो रही हैं लेकिन, सीटों पर निर्णय नहीं हो सका।

 

Posted By: Nawal Mishra

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप