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कांग्रेस सांसद राकेश राठौर दुष्कर्म के आरोप से बरी, हाई कोर्ट ने कहा- दोनों के बीच सहमति वाला संबंध था

Published: Sat, 26 Sep 2026 10:52 PM (IST)

कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को सीतापुर दुष्कर्म मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बरी कर दिया है।

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HighLights

  1. कांग्रेस सांसद राकेश राठौर दुष्कर्म मामले में बरी।

  2. हाईकोर्ट ने इसे सहमति वाला विवाहेतर संबंध माना।

  3. विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप खारिज।

विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सीतापुर से जुड़े दुष्कर्म के मामले में कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को बड़ी राहत देते हुए उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने कहा कि अभियोजन के सक्ष्यों से ही कथित दुष्कर्म पीड़िता व सांसद के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहमति वाले विवाहेतर संबंध के संकेत मिलते हैं। ऐसे में विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म किए जाने का आरोप प्रथमदृष्टया मजबूत संदेह पैदा नहीं करता।

विवाहेतर संबंध की ओर संकेत

कोर्ट ने कहा कि कथित पीड़िता स्वयं अपने बयान में बता चुकी है कि उसकी राकेश राठौर से सार्वजनिक बैठकों के दौरान मुलाकात हुई थी। राठौर ने उसे राजनीतिक संरक्षण और गठबंधन की पेशकश की थी, जिसे उसने स्वीकार किया।

इसके बाद उसे तैलिक महासंघ में जिला महिला अध्यक्ष बनाया गया और दोनों के बीच निकटता बढ़ी। अपने फैसले में पीड़िता के पति के बयान का भी कोर्ट ने उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि राठौर शिकायतकर्ता पीड़िता को अक्सर अपने घर बुलाते थे और वह कई बार देर रात तक वहां रहती थी।

कोर्ट ने इन तथ्यों के आधार पर कहा कि अभियोजन सामग्री दोनों विवाहित और परिपक्व उम्र के व्यक्तियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहमति वाले विवाहेतर संबंध की ओर संकेत करती है। यह स्थिति विवाह का झांसा देकर संबंध बनाने के आरोप के विपरीत है।

महिला के परिवार का बयान भी शामिल

फैसले में कोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि शिकायतकर्ता के पति, उसके विवाहित बेटे और बहू ने उसके आरोपों का समर्थन किया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ये सभी लोग क्रमशः राठौर पर अपनी पत्नी, मां और सास से विवाह नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं।

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन की सामग्री में शिकायतकर्ता की ओर से ऐसी कहानी सामने आती है, जिस पर सामान्य विवेक वाला व्यक्ति विश्वास नहीं कर सकता। ऐसी स्थिति में आरोपों से राठौर के अपराध करने का मजबूत संदेह पैदा नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे परस्पर विरोधी और आधारहीन आरोपों पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा और इससे न्याय विफल होगा।

जनवरी 2025 में दर्ज हुआ था राकेश राठौर के खिलाफ मुकदमा

मामले में शिकायतकर्ता ने जनवरी 2025 में सीतापुर के कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि वर्ष 2020 में राठौर ने उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में पत्नी को तलाक देकर उससे शादी करने का भरोसा देकर संबंध बनाए। राठौर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। विचारण कोर्ट ने सांसद की ओर से दाखिल आरोपमुक्ति की अर्जी खारिज कर दी थी और बाद में आरोप भी तय कर दिए थे।

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