लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। 'जितिन प्रसाद कांग्रेस छोड़कर न जाते तो क्या करते...?' पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इन शब्दों के साथ छिड़े तर्क-वितर्क साफ इशारा कर रहे हैं कि पार्टी में अंतर्कलह बढ़ने के आसार हैं। नेतृत्व से नाराजगी के चलते ही करीब 20 नेताओं के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद द्वारा पार्टी छोड़ने के साथ उन कयासों को भी बल गया है कि कांग्रेस से जुड़े सबसे पुरानों में से एक राजनीतिक परिवार के युवा नेता भी जल्द ही दूसरे दल, खास तौर पर सपा का दामन थाम सकते हैं।

रुहेलखंड क्षेत्र में जो परिवार दशकों से पार्टी का चेहरा बना रहा, उसके कद्दावर नेता जितिन प्रसाद बुधवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने भाजपा की सदस्यता लेते वक्त खुलकर कांग्रेस के किसी नेता के बारे में कुछ नहीं कहा, लेकिन समर्थक इसके पीछे कारणों पर बहस गर्माए हुए हैं। अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर से खुलकर सामने नहीं आए, लेकिन सवाल उठा रहे हैं कि जब काफी समय से जितिन की बेरुखी नजर आ रही थी तो नेतृत्व ने उनसे कोई बात क्यों नहीं की।

यही नहीं, वह पार्टी से सवर्णों को जोड़ने का जो प्रयास कर रहे थे, उसे भी बड़े नेताओं का साथ नहीं मिला। इसके अलावा उनके गृह क्षेत्र में उनका विरोध हुआ तो साजिश के आरोप पार्टी के ही बड़े पदाधिकारियों पर लगे, जिसका आडियो भी वायरल हुआ था। इसके बाद भी संवादनहीनता बनी रही। उन्नाव की पूर्व सांसद अन्नू टंडन भी नेतृत्व के रुख से नाराज होकर ही समाजवादी पार्टी में गईं।

अब कांग्रेस पार्टी में चर्चा बड़े जोरों से है कि जितिन प्रसाद के जो समर्थक रहे हैं, उनमें से भी कई नेता कांग्रेस छोड़ सकते हैं। कार्यकर्ताओं के अलावा एक बड़े नेता का नाम काफी चल रहा है। बताया गया है कि उनके मध्यस्थ सपा नेताओं के संपर्क में हैं। यह ऐसे युवा नेता हैं, जिनका परिवार लंबे अर्से से गांधी-नेहरू परिवार से जुड़ा है और भरोसेमंद है। इस परिवार का अपना सियासी वजूद है। यदि यह नेता भी पाला बदलते हैं तो 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका होगा।

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