लखनऊ, राज्य ब्यूरो। कांग्रेस पार्टी में भगदड़ जारी है। पार्टी की ओर से घोषित किये गए प्रत्याशियों के कांग्रेस छोड़कर दूसरे दलों का दामन थामने का सिलसिला जारी है। इसे देखते हुए पार्टी के कार्यकर्ता भी अब कहने लगे हैं कि कांग्रेस के कर्ता-धर्ताओं को प्रत्याशियों की पहचान नहीं है। वे पार्टी के फीडबैक तंत्र और स्क्रीनिंग प्रक्रिया को लेकर भी अंदरखाने सवाल कर रहे हैं। 

कांग्रेस ने 13 जनवरी को 125 प्रत्याशियों की अपनी पहली सूची जारी की थी। उसमें रामपुर की चमरव्वा सीट से प्रत्याशी बनाये गए यूसुफ अली यूसुफ ने अगले ही दिन समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे। यह बात और है कि सपा ने उन्हें टिकट के काबिल नहीं समझा तो वह पुराने ठिकाने में वापस आने के लिए मजबूर हुए। न सिर्फ उन्होंने माफीनामा लिखकर कांग्रेस से क्षमा मांगी बल्कि अपना वीडियो जारी करना पड़ा जिसमें सपा मुखिया अखिलेश यादव पर उन्हें धोखा देने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने भी उन्हें गले लगाने में देर नहीं की और अपना चुनाव चिन्ह भी सौंप दिया। 

कांग्रेस को दूसरा झटका भी रामपुर में ही लगा। यहां की स्वार सीट से पार्टी के प्रत्याशी घोषित किये गए हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां ने कांग्रेस का साथ छोड़ अपना दल (सोनेलाल) से हाथ मिला लिया और अब उसके उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे। जैसे इतना ही कम न था, कांग्रेस की ओर से बरेली कैंट की प्रत्याशी घोषित की गईं सुप्रिया ऐरन अपने पति व कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन के साथ शनिवार को समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं। सपा ने उन्हें बरेली कैंट सीट से ही अपना उम्मीदवार घोषित करने में देर नहीं की। 

इससे पहले भी कांग्रेस नेताओं का पार्टी को छोड़कर दूसरे दलों में जाने का सिलसिला जारी था लेकिन, वह तब था जब पार्टी ने विधान सभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए थे। गौरतलब है कि कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित करने से पहले जिला कमेटियों और विभिन्न माध्यमों से उनके बारे में फीडबैक हासिल किया था। टिकट के आवेदकों से साक्षात्कार करने के लिए पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी जिलों में गई थी। पार्टी का दावा है कि हर जिले में उसका संगठनात्मक तंत्र है। इसके बावजूद प्रत्याशियों के पार्टी छोडऩे के बारे में पार्टी को भनक नहीं लग सकी।

Edited By: Vikas Mishra