लखनऊ, जेएनएन। सोनभद्र और उन्नाव के माखी कांड को लेकर हुए प्रदर्शन में तो कांग्रेस की सक्रियता नजर आई थी लेकिन, महंगी बिजली के खिलाफ पार्टी की रणनीति धरी रह गई। राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा ने प्रदेश भर में चार दिन के जनआंदोलन की हुंकार भरी थी, जो कमजोर संगठन के कंधों पर दम तोड़ गई।

प्रदेश प्रभारी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा की नजर अगले विधानसभा चुनाव पर है। उन्होंने सूबे में सक्रियता बढ़ा दी है। सरकार के खिलाफ मिलने वाले हर मुद्दे को वह उठाना चाहती हैं। पिछले कुछ मामलों में उन्हें सफलता मिली भी है। इसी तरह प्रियंका ने हाल ही में सरकार द्वारा बिजली दरों में की गई वृद्धि के खिलाफ आंदोलन का निर्णय लिया। वह चाहती थीं कि कांग्रेस के इस आंदोलन के साथ जनता भी जुड़े। इसके लिए शुक्रवार को हर जिले के प्रमुख बाजारों में लालटेन जुलूस, फिर शनिवार, रविवार और सोमवार को ब्लॉक स्तर तक हस्ताक्षर अभियान चलाने के निर्देश दिए।

प्रियंका के निर्देश पर कांग्रेसियों ने एक-एक सांकेतिक जुलूस तो निकाल दिया लेकिन, उसके बाद हस्ताक्षर अभियान को लेकर पार्टीजनों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। तीन दिन गुजर चुके हैं लेकिन, राजधानी तक में कहीं कोई माहौल नजर नहीं आया। इतने गंभीर विषय पर भी जनता को कांग्रेस नहीं जोड़ सकी। इसकी एक वजह यह भी मानी जा रही है कि संगठन में परिवर्तन की हलचल तो तीन माह से चल रही है लेकिन, अब तक निर्णय नहीं हो सका है। सभी जिला कमेटियां भंग पड़ी हैं।

 

Posted By: Anurag Gupta

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