लखनऊ (जेएनएन)। उत्तर प्रदेश में 403 सीटों के लिए चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। इसी के साथ आदर्श आचार संहिता भी प्रभावी हो गई है। उत्तर प्रदेश में मतदान 11, 15, 19, 23, 27 फरवरी तथा 4 और 8 मार्च को तथा मतगणना 11 मार्च को होगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव पहले चरण में मेरठ मंडल के जिलो में चुनाव होंगे। इलेक्शन कमीशन के मुताबिक 1 जनवरी 2017 तक यूपी में 13, 85, 17, 026 वोटर्स हैं। वोटर्स की फाइनल लिस्ट 12 जनवरी को जारी की जाएगी।

आचार संहिताः उत्तर प्रदेश में वाहनों से लालबत्ती, हूटर और झंड़े हटाने का अभियान

सत्ताधारी दल के लिए आचार संहिता

  • मंत्री अपने सरकारी दौरों को चुनाव प्रचार से नहीं जोड़ेंगे। चुनाव प्रचार करते हुए वे सरकारी मशीनरी और कार्मिकों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
  • सत्ताधारी दल के हित को बढ़ावा देने के लिए सरकारी विमानों, वाहनों, मशीनरी और कार्मिकों का इस्तेमाल नहीं हो सकेगा।
  • सभास्थल पर हैलीपैड बनाने या चुनावी सभाएं करने के लिए किसी मैदान पर सत्ताधारी दल का एकाधिकार नहीं होगा। ऐसे स्थानों का इस्तेमाल दूसरे दलों व प्रत्याशियों को भी उन्हीं शर्तों पर करने दिया जाए, जिन शर्तों पर सत्ताधारी दल उनका इस्तेमाल करता है।
  • सत्ताधारी दल या उसके प्रत्याशियों का विश्रामगृहों, डाक बंगलों या अन्य सरकारी आवासों पर एकाधिकार नहीं होगा। ऐसे आवासों का प्रयोग निष्पक्ष तरीके से करने के लिए अन्य दलों और उनके प्रत्याशियों को भी अनुमति होगी लेकिन, दल या उम्मीदवार ऐसे आवासों और उनके परिसरों का प्रचार कार्यालय या चुनाव प्रचार के लिए सार्वजनिक सभा करने के उद्देश्य से इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
  • सरकारी पैसे से कोई विज्ञापन समाचार पत्रों, टीवी चैनलों और अन्य माध्यमों पर नहीं दिया जाएगा।
  • मंत्री और अन्य प्राधिकारी विवेकाधीन निधि से अनुदान नहीं स्वीकृत करेंगे।
  • मंत्री या अन्य प्राधिकारी किसी भी रूप में कोई भी वित्तीय मंजूरी या वचन देने की घोषणा नहीं करेंगे। वे (लोक सेवकों को छोड़कर) किसी प्रकार की परियोजनाओं व योजनाओं की आधारशिलाएं नहीं रखेंगे।
  • सड़कों के निर्माण का कोई वचन नहीं देंगे, पीने के पानी की सुविधाएं नहीं देंगे।
  • शासन या सार्वजनिक उपक्रमों आदि में कोई भी तदर्थ नियुक्ति नहीं की जाएगी।
  • केंद्र या राज्य सरकार के मंत्री प्रत्याशी, मतदाता या प्राधिकृत अभिकर्ता की हैसियत को छोड़कर किसी भी मतदान केंद्र या गणना स्थल में प्रवेश नहीं करेंगे।

तस्वीरों में देखें-यूपी में चुनाव आचार संहिता का आचरण

सभी दलों के लिए सामान्य आचरण

  • किसी दल या उम्मीदवार को कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए जो विभिन्न जातियों और धार्मिक या भाषाई समुदायों के बीच मतभेद बढ़ाने, घृणा या तनाव पैदा करे।
  • दूसरे राजनीतिक दलों की आलोचना उनकी नीतियों और कार्यक्रम, पुराने रिकॉर्ड और काम तक ही सीमित होनी चाहिए। व्यक्तिगत जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना नहीं की जानी चाहिए जिनका संबंध अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक क्रियाकलाप से न हो। जिन आरोपों की सत्यता न स्थापित हुई हो, उनके आधार पर आलोचना नहीं की जानी चाहिए।
  • वोट हासिल करने के लिए जातीय या सांप्रदायिक भावनाओं की दुहाई नहीं देनी चाहिए। मस्जिदों, गिरजाघरों, मंदिरों या पूजा के अन्य स्थानों का चुनाव प्रचार के मंच के तौर पर इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
  • वोटरों को रिश्वत देने, उन्हें डराने/धमकाने, मतदाताओं का प्रतिरूपण, मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में वोट मांगना, मतदान खत्म होने से पहले के 48 घंटे के दौरान सार्वजनिक सभाएं करना, वोटरों को वाहनों से मतदान केंद्र ले जाने और वापस लाने की मनाही होगी।
  • व्यक्तियों के विचारों या कार्यों का विरोध करने के लिए उनके घरों के सामने प्रदर्शन या धरना नहीं देना चाहिए।
  • ध्वजदंड बनाने, झंडा टांगने, सूचनाएं चिपकाने, नारे लिखने आदि के लिए किसी भी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसके भूमि, भवन, अहाते, दीवार, आदि का इस्तेमाल नहीं होगा।
  • राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके समर्थक अन्य पार्टियों द्वारा आयोजित सभाओं, जुलूसों, आदि में बाधाएं न पैदा करें या उन्हें भंग न करें। किसी दल द्वारा जुलूस उन स्थानों से होकर नहीं ले जाना चाहिए जिन स्थानों पर दूसरे दल की सभाएं हो रही हों। एक दल की ओर से लगाये गए पोस्टर दूसरे दल के कार्यकर्ताओं को नहीं हटाने चाहिए।

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सभाओं के लिए

  • दल या प्रत्याशी को किसी प्रस्तावित सभा के स्थान और समय के बारे में स्थानीय प्राधिकारियों को उपयुक्त समय पर सूचना दे देनी चाहिए ताकि वे यातायात को नियंत्रित करने और शांति व्यवस्था बनाये रखने के जरूरी इंतजाम कर सकें।
  • किसी सभा में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के लिए राजनीतिक दल या प्रत्याशी को संबंधित प्राधिकारी के पास काफी पहले से आवेदन कर इसकी अनुमति लेनी चाहिए।
  • यदि किसी सभा में कोई विघ्न डालता है या अव्यवस्था फैलाता है तो सभा के आयोजकों को ऐसे लोगों के खिलाफ खुद न कार्रवाई करते हुए ड्यूटी पर तैनात पुलिस की सहायता लेनी चाहिए।

जुलूस के लिए

  • जुलूस का आयोजन करने वाले दल या प्रत्याशी को पहले ही तय कर लेना चाहिए कि जुलूस किस समय और स्थान से शुरू होगा, किस रास्ते से होकर गुजरेगा और किस समय कहां समाप्त होगा। सामान्य तौर पर जुलूस के कार्यक्रम में कोई फेरबदल नहीं होना चाहिए।
  • आयोजकों को कार्यक्रम के बारे में स्थानीय पुलिस प्राधिकारियों को पहले से सूचना दे देनी चाहिए ताकि वे जरूरी इंतजाम कर सकें।
  • आयोजकों को पता कर लेना चाहिए कि जिन इलाकों से जुलूस गुजरेगा, उनमें कोई निर्बन्धात्मक आदेश तो नहीं लागू हैं। जब तक सक्षम प्राधिकारी विशेष छूट न दे, तब तक उन्हें निर्बन्धों का पालन करना चाहिए।
  • आयोजकों को जुलूस ऐसे निकालना चाहिए जिससे कि यातायात में रुकावट या बाधा न पैदा हो। यदि जुलूस बहुत लंबा है तो उसे उपयुक्त लंबाई वाले टुकड़ों में संगठित किया जाना चाहिए ताकि चौराहों आदि पर ट्रैफिक जाम न हो जाए।
  • जुलूसों को जहां तक हो सके सड़क के दाईं ओर रखा जाना चाहिए और ड्यूटी पर तैनात पुलिस के निर्देश व सलाह का कड़ाई से पालन करना चाहिए।
  • यदि दो या अधिक राजनीतिक दलों या प्रत्याशियों ने लगभग एक ही समय पर एक ही रास्ते से या उसके किसी हिस्से से जुलूस निकालने का प्रस्ताव किया है तो आयोजकों को चाहिए कि वे आपस में संपर्क कर ऐसी योजना बनाएं ताकि जुलूसों में टकराव न हो। उन्हें सहायता के लिए यथाशीघ्र पुलिस से भी संपर्क करना चाहिए।
  • जुलूस में शामिल लोगों द्वारा ऐसी चीजें लेकर चलने के बारे में जिनका अवांछनीय तत्वों द्वारा उत्तेजना के क्षणों में दुरुपयोग किया जा सकता है, राजनीतिक दलों या प्रत्याशियों को उन पर ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण रखना चाहिए।
  • किसी भी राजनीतिक दल या प्रत्याशी को अन्य पार्टियों के सदस्यों या उनके नेताओं के पुतले लेकर चलने, उन्हें सार्वजनिक स्थान पर जलाने और इसी प्रकार के अन्य प्रदर्शनों का समर्थन नहीं करना चाहिए।

मतदान दिवस के लिए

  • सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को चाहिए कि वे चुनाव ड्यूटी पर लगे अधिकारियों के साथ सहयोग करें।
  • राजनीतिक दल और प्रत्याशी अपने प्राधिकृत कार्यकर्ताओं को उपयुक्त बिल्ले या पहचान पत्र दें।
  • राजनीतिक दल और उनके प्रत्याशी इस बात से सहमत हों कि उनके द्वारा दी गईं पहचान पर्चियां सादे (सफेद) कागज पर होंगी और उन पर कोई प्रतीक, उम्मीदवार या दल का नाम नहीं होगा।
  • मतदान के दिन और उससे पहले के 48 घंटों के दौरान किसी को शराब पेश या वितरित न करें।
  • राजनीतिक दल और उम्मीदवार मतदान केंद्रों के निकट लगाये गए कैंपों के पास अनावश्यक भीड़ नहीं इकट्ठा होने दें।
  • मतदान केंद्रों के पास लगे कैंप साधारण हों। उन पर कोई पोस्टर, झंडा, प्रतीक या कोई अन्य प्रचार सामग्री प्रदर्शित नहीं की जाए। कैंप में खाद्य पदार्थ न पेश किये जाएं।
  • राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को मतदान के दिन वाहन चलाने पर लगाये जाने वाले निर्बन्धों का पालन करना चाहिए। वाहनों के लिए परमिट प्राप्त कर उन्हें वाहन पर ऐसे लगाना चाहिए जिससे कि वे साफ दिख सकें।
  • मतदाताओं के अलावा कोई भी व्यक्ति निर्वाचन आयोग की ओर से जारी पास के बिना मतदान केंद्रों में प्रवेश नहीं करेगा।

Posted By: Nawal Mishra

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