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'बीमारू राज्य नहीं, उसे चलाने वाले राजनेताओं की थी मानसिकता बीमारू', सीएम योगी ने सपा पर साधा निशाना

Published: Thu, 17 Sep 2026 10:07 PM (IST)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सपा सरकार पर हस्तशिल्पियों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी मानसिकता बीमारू थी।

बीमारू राज्य नहीं, उसे चलाने वाले नेताओं की थी मानसिकता बीमारू: सीएम योगी।

बीमारू राज्य नहीं, उसे चलाने वाले नेताओं की थी मानसिकता बीमारू: सीएम योगी।

HighLights

  1. योगी ने पिछली सपा सरकार की हस्तशिल्पियों के प्रति उपेक्षा पर सवाल उठाए।

  2. विश्वकर्मा स्वरोजगार मेला शुरू, कारीगरों को प्रशिक्षण और ऋण सुविधा।

  3. विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना में 25 नए ट्रेड जोड़े गए।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। पिछली सपा सरकार की कार्यशैली और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सैफई महोत्सव, मुंबई के डांस और बर्मिंघम की बग्गी से जन्मदिन मनाने से फुर्सत मिलती, तभी हस्तशिल्पियों और कारीगरों की सुध लेने का समय निकाल पाते। स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर ध्यान ही नहीं दिया गया।

इसके विपरीत डबल इंजन सरकार हुनर को बाजार से जोड़कर श्रमिकों को उद्यमी बनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने जोड़ा कि राज्य बीमारू नहीं था, प्रदेश को संचालित करने वाले राजनेताओं की मानसिकता बीमारू थी, जो हस्तशिल्पियों और कारीगरों का सम्मान नहीं करती थी।

गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी और वीएसएसवाई (विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना) 2.0 के मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का उद्घाटन किया।

कहा कि 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस पर एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना और 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई।

भगवान विश्वकर्मा की जयंती और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर कारीगरों व हस्तशिल्पियों के सम्मान के लिए यह आयोजन महत्वपूर्ण है, इसमें पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट और स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।

सात वर्षों में छह लाख हस्तशिल्पियों, कारीगरों को प्रशिक्षण के साथ टूलकिट दी जा चुकी है। योजना में 10 दिन का निश्शुल्क प्रशिक्षण, पांच हजार रुपये मानदेय और प्रशिक्षण पूरा होने पर 15 हजार रुपये तक की टूलकिट दी जाती है।

पांच नए ट्रेड जोड़े, 25 में प्रशिक्षण‌

शिल्प परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि समुद्र पर सेतु निर्माण करने वाले नल, नील को विश्वकर्मा का मानस पुत्र माना जाता है। आज के कारीगर उसी परंपरा के प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि जब कारीगर और हस्तशिल्पी आत्मनिर्भर थे, तब भारत की आर्थिक ताकत मजबूत थी।

बाद में बाजार, बैंकिंग, डिजाइन और तकनीक से न जुड़ने के कारण उनका हुनर सीमित हो गया और उद्यमी श्रमिक बनने को मजबूर हो गए। योगी ने कहा कि 2017 में कारीगर हताशा और पलायन की स्थिति में थे। अब उन्हें रोजगार और उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है।

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना में पहले 16 ट्रेड थे। अब मूर्तिकार, दूधिया, माला बनाने वाला माली, भड़भूजा और मछुआरा समेत नए ट्रेड जोड़े गए हैं। मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रानिक वस्तुओं की मरम्मत, विद्युत उपकरण, प्लंबिंग, कंप्यूटर, सोलर इंस्टालेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर जैसे ट्रेड भी शामिल हैं। इन 25 ट्रेड का लक्ष्य कारीगरों को उद्यमी बनाना है।

10 लाख तक ब्याज व गारंटी-मुक्त ऋण

योगी ने कहा कि प्रशिक्षण और टूलकिट के बाद कारीगरों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना जरूरी है। सीएम युवा उद्यमी योजना में युवाओं को पांच लाख रुपये तक ब्याज व गारंटी-मुक्त ऋण दिया जा रहा है, जबकि कारीगरों के लिए सीमा 10 लाख रुपये तक है। 10 से 15 प्रतिशत मार्जिन मनी की भी व्यवस्था है। ऋण का ब्याज सरकार उठाएगी और कारीगर को गारंटी नहीं देनी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 96 लाख एमएसएमई इकाइयां स्थापित हैं, जिनसे करीब 3.25 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। बड़ी आबादी, उपजाऊ भूमि, पर्याप्त जल संसाधन और युवा जनशक्ति प्रदेश की ताकत हैं।

ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में 25 से 29 सितंबर तक यूपी ट्रेड शो होगा। जिसमें 650 से अधिक विदेशी खरीदारों के शामिल हो सकते हैं। 12 से 15 हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार होने की संभावना है।

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