CM योगी का बयान, लोक सेवकों की तय हो जवाबदेही; झूठी शिकायतों पर भी कसे शिकंजा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकायुक्त के 50वें स्थापना दिवस पर लोक सेवकों की जवाबदेही तय करने और झूठी शिकायतों पर ...और पढ़ें
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HighLights
लोक सेवकों के गलत आचरण की जवाबदेही तय करना जरूरी।
झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ भी होगी कार्रवाई।
लोकायुक्त ने 50 वर्षों में 1.25 लाख मामलों में की कार्रवाई।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि लोक सेवकों के गलत आचरण की जवाबदेही तय करना जरूरी है। सत्ता और पद मिलने के बाद व्यक्ति के उद्दंड व्यवहार पर अंकुश लगाने में लोकायुक्त जैसी संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवैधानिक संस्थाओं में आम नागरिक का विश्वास है।
मुख्यमंत्री सोमवार को गोमतीनगर स्थित लोकायुक्त कार्यालय में संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने रामचरितमानस की पंक्ति ‘प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यवस्था में मर्यादा और जवाबदेही बनाए रखने के लिए प्रभावी निगरानी आवश्यक है।
शिकायतों का निस्तारण तथ्यों और मेरिट के आधार पर समयबद्ध तरीके से होना चाहिए। शिकायत करने की व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों व झूठी शिकायत कर सरकारी तंत्र का समय नष्ट करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में करीब 60 प्रतिशत शिकायतें सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित होती थीं।
ई-पास मशीनों और उचित दर की दुकानों को तकनीक से जोड़ने के बाद आज 16 करोड़ लोगों को राशन मिल रहा है और पीडीएस से जुड़ी शिकायतें लगभग शून्य हो गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में राजस्व से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे, जिनका समाधान किया गया। इस अवधि में नौ लाख नए मामले भी सामने आए। पैमाइश में गड़बड़ी रोकने के लिए हर तहसील में रोवर उपलब्ध कराए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने एआई, डाटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने लोकायुक्त की 50 वर्षों की यात्रा का दस्तावेजीकरण करने और संस्था की भूमिका को और प्रभावी बनाने के लिए कहा। गौरतलब है कि लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट पर ही बसपा सरकार के दौरान 2010 में राजेश त्रिपाठी को मंत्री पद गंवाना पड़ा था।
लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चरित्र से जुड़ा प्रश्न है। मुख्यमंत्री ने लोकायुक्त की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन भी किया।
50 वर्षों में 1.25 लाख मामलों में हुई कार्रवाईलोकायुक्त संगठन का गठन 14 सितंबर 1977 को किया गया था। तब से लेकर पिछले अगस्त तक 1,25,056 परिवादों (मामलों) में कार्रवाई की गई। वहीं, पिछले नौ वर्षों में 22,669 मामले लोकायुक्त कार्यालय को प्राप्त हुए जिनमें से 20,553 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। बीते नौ वर्षों में परिवादियों को 33.55 करोड़ रुपये की आर्थिक राहत दिलाई गई है। पिछले पांच वर्षों में 186 प्रतिवेदन, 35 विशेष प्रतिवेदन और 37 संस्तुतियां सक्षम प्राधिकारियों को भेजी गईं।
