लखनऊ, [राजीव दीक्षित]। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 21 फरवरी को जब यूपी इन्वेस्टर्स समिट के मंच से घोषणा की थी कि प्रदेश में 4.28 लाख करोड़ रुपये के निवेश के लिए 1045 समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित हो चुके हैं तो मुख्य पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा था, लेकिन क्षणिक स्तब्धकारी सन्नाटे के बाद। कभी ‘बीमारू’ राज्यों में शुमार रहे उत्तर प्रदेश की क्षमताओं में निवेशकों का यह अभूतपूर्व विश्वास किंचित विस्मयकारी जो था। पांच दिन बाद 26 फरवरी को अफसरों के साथ समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने एलान किया कि समझौता ज्ञापनों की संख्या 1074 और कुल प्रस्तावित निवेश का आंकड़ा 4.68 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है।

यह आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि औद्योगिक क्षेत्र को उदारीकरण का टॉनिक भले ही तीन दशकों से पिलाया जा रहा हो, लेकिन उप्र में उसके वांछित परिणाम तो योगी सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद ही दिखाई दिए हैं। सत्ता संभालने के साथ ही मुख्यमंत्री का फोकस इस बात पर था कि देश के सबसे बड़े बाजार के तौर पर ख्यातिप्राप्त उप्र देश का सबसे आकर्षक निवेश गंतव्य भी बने। किसानों की कर्जमाफी की शुरुआती चुनौती से निपटने के बाद सरकार का सबसे ज्यादा फोकस सूबे के औद्योगिक विकास पर ही रहा।

अरसे से खाली पड़े अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त की कुर्सी पर लगभग चार साल बाद डॉ. अनूप चंद्र पांडेय के रूप में किसी पूर्णकालिक अधिकारी की तैनाती हुई और इन्वेस्टर्स समिट को सफल बनाने व संभावित निवेशकों को सकारात्मक संदेश देने के लिए पहली बार देश के छह महानगरों में रोड शो आयोजित हुए। इंडस्ट्रीयल फ्रंट को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने जो मोर्चा संभाला, उसका परिणाम इन्वेस्टर्स समिट की आशातीत सफलता के तौर पर सामने आया। सरकार का दावा है कि निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरे तो 33 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। हालांकि सरकार के सामने अब असल चुनौती निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की है।

उद्योगों को डिजिटल क्लियरेंस

उद्यमियों से किया वादा निभाते हुए योगी सरकार ने उद्योगों की स्थापना के लिए विभिन्न विभागों की आवश्यक स्वीकृतियां, अनापत्तियां और लाइसेंस आदि जारी करने के लिए ‘निवेश मित्र’ नामक डिजिटल क्लियरेंस सिंगल विंडो सिस्टम की शुरुआत की है। निवेश मित्र के जरिये उद्यमियों को 20 विभागों की 70 से अधिक सेवाएं मिल सकेंगी। सभी स्वीकृतियां और अनापत्तियां एक कॉमन एप्लीकेशन फार्म के जरिये ऑनलाइन और एक छत के नीचे मिलेंगी। कहने को तो सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था पिछली सरकारों में भी थी, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय की निगहबानी में इसका संचालन पहली बार किया जा रहा है।

मार्गदर्शक की भूमिका में राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड

प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने और औद्योगिक परियोजनाओं की स्थापना के बारे में तेजी से निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में न सिर्फ राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड गठित किया जा चुका है, बल्कि इसकी एक बैठक भी हो चुकी है। यह बोर्ड प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए रणनीति तैयार करने में मार्गदर्शन देगा। सूबे को निवेश के गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए निवेशकों और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच इंटरफेस का काम करने वाले इस बोर्ड में उद्योगपतियों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।

नीतियों का पिटारा, गैर परंपरागत क्षेत्रों की ओर बढ़े कदम

हाशिये पर पड़े औद्योगिक विकास को मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश जुटाने के लिए नीतियों का ताना-बाना बुना। इन नीतियों में निवेश के एवज में सरकार की ओर से दिए जाने वाले प्रोत्साहनों को रोजगार से जोड़ा गया। समय की मांग को भांपकर पहली बार सरकार ने लॉजिस्टिक्स एंड वेयरहाउसिंग, एयरोस्पेस एंड डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्टिकल व्हीकल्स, फार्मास्यूटिकल्स जैसे गैर परंपरागत क्षेत्रों में निवेश जुटाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए।

कानून व्यवस्था के मोर्चे पर जीती साख

योगी राज में कानून व्यवसथा को लेकर विपक्षी दल चाहें जो आरोप लगाएं, लेकिन निवेश के लिए बड़े पैमाने पर हुए एमओयू यह गवाही दे रहे हैं कि कानून व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार कहीं न कहीं निवेशकों का विश्वास जीतने में कामयाब रही है।

Posted By: Digpal Singh