अयोध्या, जेएनएन। राममंदिर ट्रस्ट गठन होने के बाद प्रदेश सरकार रामनगरी के विकास को लेकर और भी गंभीर हो गई है। ट्रस्ट गठन के बाद रामनगरी की हाल जानने व विकास कार्यों की प्रगति की नब्ज टटोलने के लिए मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या विधायक वेदप्रकाश गुप्त से गुरुवार को वार्ता की। सीएम ने अयोध्या विधायक को विकास कार्यों की मॉनीटरिंग निरंतर करते रहने का निर्देश दिया है। 

उधर, सदियों के विवाद से रामजन्मभूमि की मुक्ति की खुशी में विजय स्तंभ 23 फरवरी को स्थापित होगा। इसे गरुड़ स्तंभ नाम दिया गया है। रामनगरी की शीर्ष पीठ श्रीराम ज्योतिष पीठ सुग्रीवकिला के प्रांगण में 23 फीट ऊंचे इस स्तंभ का अनावरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। यह मौका, आश्रम के संस्थापक जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित वैकुंठोत्सव का होगा। 

संत-महंतों की भावनाओं से सीएम को कराया अवगत

अयोध्या में 330 करोड़ की पर्यटन योजनाओं का काम चल रहा है। सीएम ने स्मार्ट सिटी, प्रभु श्रीराम की प्रतिमा स्थापना, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण, गोशाला के उच्चीकरण और रामायण सर्किट के अंतर्गत स्वीकृत योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। विधायक ने सीएम को रामनगरी के संत-महंतों की भावनाओं से अवगत करने के साथ कहा कि शासन की ओर से अयोध्या के विकास की जो प्राथमिकताएं तय की गई हैं, उन्हें बरकरार रखा जाएगा। 

23 फरवरी को विजय स्तंभ की स्‍थापना 

23 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  रामनगरी की शीर्ष पीठ श्रीराम ज्योतिष पीठ सुग्रीवकिला के प्रांगण में 23 फीट ऊंचे इस स्तंभ का अनावरण करेंगे। वैकुंठवासी आचार्य के शिष्य एवं वर्तमान पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी विश्वेशप्रपन्नाचार्य के संयोजन में वैकुंठोत्सव 16 से 26 फरवरी तक प्रस्तावित है। अनावरण से पूर्व गरुड़ स्तंभ की विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। रविवार को सायं पांच बजे अनुज्ञा, आचार्य वरण, मृदा हरण, वास्तु होम आदि कर्मकांड के साथ उत्सव की शुरुआत होगी। अगले दिन सुबह 7.30 बजे कलशयात्रा और कुंभ स्थापन होगा। सोमवार से तीसरे पहर तीन से सायं छह बजे तक सात दिवसीय भागवतकथा का आगाज होगा। कथाव्यास वृंदावन के सुप्रसिद्ध कथाव्यास स्वामी देवनारायणाचार्य होंगे। उत्सव को शिखर का स्पर्श 23 एवं 24 फरवरी को संयोजित संत सम्मेलन के साथ मिलेगा। मुख्यमंत्री सहित देश के कई शीर्ष धर्माचार्य शिरकत करेंगे।पीठाधिपति स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य एवं व्यवस्थापक अनंत पद्मनाभाचार्य के संयोजन में वैकुंठोत्सव की तैयारियों को अंतिम स्पर्श दिया जा रहा है।

मंदिर आंदोलन के शिल्पी थे पुरुषोत्तमाचार्य

श्रीराम ज्योतिष्पीठ के संस्थापक स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य की गणना मंदिर आंदोलन के शिल्पियों में होती है। पौने चार दशक पूर्व मंदिर आंदोलन की शुरुआत उन्हीं के संरक्षण में हुई और उनका आश्रम मंदिर आंदोलन में शामिल लोगों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। 96 वर्ष की अवस्था में गत वर्ष चिरनिद्रा में लीन हुए स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य को प्रकांड संस्कृतज्ञ, प्रभावी वक्ता, तेजस्वी संत एवं समर्पित साधक के रूप में याद किया जाता है। 

Posted By: Divyansh Rastogi

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