सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान, सपा के लिए कानून-व्यवस्था को लेकर बात करना आज भी सबसे मुश्किल
CM Yogi Adityanath: यूपी के बाद असम, नागालैंड, पंजाब और जम्मू कश्मीर में एक पुलिस अधिकारी जिन्होंने पांच राज्यों में सेवा दी, उन्होंने उस अनुभव को अपनी पुस्तक में रखा।
HighLights
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में किया 87 इंटरसेप्टर वाहनों का फ्लैग ऑफ
पुलिस कर्मियों को पदक अलंकरण समारोह में सीएम ने बहादुरी को सराहा
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को लोकभवन में पुलिस के 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनमें चार पहिया व दो पहिया वाहन शामिल हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कार्यक्रम में 26 पुलिसकर्मियों को वीरता पदक से अलंकृत किया। मुख्यमंत्री ने इन पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र के अलावा एक हजार रुपये प्रतिमाह की प्रोत्साहन राशि की भी घोषणा की। उन्होंने पुलिस सुधारों पर आधारित पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया।
इसको पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने लिखा है। इसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुभव और दुनिया भर में पुलिस सुधार को लेकर किए जा रहे प्रयोगों की जानकारी दी गई है। यूपी के बाद असम, नागालैंड, पंजाब और जम्मू कश्मीर में एक पुलिस अधिकारी जिन्होंने पांच राज्यों में सेवा दी, उन्होंने उस अनुभव को अपनी पुस्तक में रखा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर अपने संबोधन में पुलिसकर्मियों का हौसला बढ़ाने के साथ समाजवादी पार्टी को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में कोई जिला ऐसा नहीं बचा था, जहां दंगे न हुए हों…। इसी कारण समाजवादी पार्टी के कानून-व्यवस्था को लेकर बात करना आज भी सबसे मुश्किल है…। जिन्हें शांति और सुरक्षा पसंद नहीं थी वो लोग हमेशा षड्यंत्र को अंजाम देते थे। यह उसको लेकर कुछ कर नहीं पाएंगे और हमारी सरकार के पास यही सबसे बड़ा हथियार है।
विषम परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता से ही परख
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक लीडर का सबसे महत्वपूर्ण गुण यह है कि सम विषम परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता हो। यही परिणाम देता है,उस समय यह देखने को मिला था। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार में शॉर्टकट का रास्ता नहीं अपनाया गया। शॉर्टकट का रास्ता जब भी व्यक्ति अपनाने का प्रयास करता है तो प्रगति का नहीं दुर्गति का ही कारण बनता है। व्यक्ति के सामने पहचान का संकट खड़ा करता है यही तो यूपी के सामने था।
लोग 2017 के पहले यूपी वाला कहकर पहले बाहर कर देते थे। हम मानते हैं कि पुलिस के सामने चुनौती थी, क्योंकि पोलिटिकल लीडरशिप में अगर निर्णय लेने की सामर्थ्य न हो और स्वयं उसकी रीढ़ टेढ़ी हो। तो वह कानून व्यवस्था को कैसे सीधी कर सकता था। यहां यही होता था। माफिया के सामने नाक रगड़ा जाता था। घुटने टेक देते थे। माफियाओं के सामने समानांतर सरकार चलती थी, पुलिस मजबूर थी, पुलिस रिफॉर्म के लिए कोई कदम नही उठाये गये।
खराब थी ट्रेनिंग की स्थिति
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहले ट्रेनिंग की स्थिति खराब थी। सालाना छह हजार पुलिस कार्मिक की ट्रेनिंग ही सकती थी। पीएसी की वाहिनियों को समाप्त कर दिया गया था। महीनों कर्फ्यू लगते थे। कोसीकलां से मेरठ और मुजफ्फरनगर में छह महीने दंगे हुए। कोई ऐसा जिला नही था, जहां दंगे न हुए हों।
