लखनऊ, जेएनएन। राज्यपाल राम नाईक ने सोमवार को पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया। भाजपा सरकार को राजभर को बाहर का रास्ता दिखाने की इतनी जल्दी थी कि सातवें चरण का मतदान समाप्त होने के साथ ही उनकी बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर से ही उनकी बर्खास्तगी की सिफारिश राज्यपाल को भेज दी और राज्यपाल ने भी स्वीकृति देने में देर नहीं की। 2019 के लोकसभा चुनाव का परिणाम आने से पहले ही न केवल राजभर बल्कि आयोग, निगम और परिषद में पदासीन उनकी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के सात सदस्यों को भी पदमुक्त कर दिया गया। ओमप्रकाश राजभर को बर्खास्त करने के बाद उनके सभी विभाग को मंत्री अनिल राजभर को दिया गया है। अनिल राजभर का कद बढ़ गया है। 

योगी सरकार के गठन के बाद मंत्रिमंडल से यह पहली बर्खास्तगी है। मंत्री बनने के डेढ़ माह बाद से ही राजभर ने सरकार के विरोध में स्वर मुखर किया तो फिर यह सिलसिला थमा नहीं। राजभर ने तो शुरुआत में ही चेतावनी दी थी कि गाजीपुर के डीएम को हटाया जाए अन्यथा वह मंत्री पद छोड़ देंगे। योगी ने राजभर की अनसुनी कर दी। फिर तो राजभर के हमले तेज होते गये। पिछड़ों के आरक्षण में बंटवारे का मुद्दा लेकर राजभर ने रार छेड़ दी।

राजभर ने अपनी पार्टी के स्थापना दिवस पर पिछले वर्ष 27 अक्टूबर को रमाबाई अंबेडकर मैदान में रैली की। तब भी यह संकेत था कि वह मंत्री पद छोड़ देंगे लेकिन, उन्होंने समर्थकों से पूछा कि मैं मंत्री पद पर रहूं या नहीं। फिर खुद ही बोले कि आप लोग कह रहे हैं तो मैं इस्तीफा नहीं दे रहा हूं। राजभर ने इसके बाद भी तारीख पर तारीख दी लेकिन, मंत्री पद नहीं छोड़ा। इसके बाद लोकसभा चुनाव में पांच सीटों की मांग रखी। लोकसभा प्रभारी जेपी नड्डा से लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के यहां पंचायत हुई लेकिन, बात नहीं बनी। फिर राजभर एक रात योगी के आवास पर चले गये और अपना इस्तीफा दे आए लेकिन, यह इस्तीफा भी सही फोरम तक नहीं पहुंचा। इस बीच भाजपा ने राजभर को घोसी सीट भाजपा के सिंबल पर लड़ने की पेशकश की लेकिन, वह नहीं माने।

उन्होंने 39 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। राजभर ने लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय समेत कई प्रमुख उम्मीदवारों के क्षेत्र में उम्मीदवार उतारे और भाजपा को कमजोर करने की खूब कोशिश की। मऊ की एक सभा में राजभर ने भाजपा नेताओं को गाली दी और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। उन पर मुकदमा दर्ज हुआ और अंतत: उनकी बर्खास्तगी भी कर दी गई।

राजभर योगी सरकार में दो वर्ष दो माह रहे मंत्री

2017 के विधानसभा चुनाव से पहले ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा से गठबंधन किया और चुनाव मैदान में उनके आठ उम्मीदवार उतरे। ओमप्रकाश समेत कुल चार लोग चुनाव जीते। राजभर को पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री बनाया गया। योगी सरकार में दो वर्ष दो माह मंत्री रहने के बाद उन्हें सत्ता से वंचित होना पड़ा है।

पुत्र अरविंद और सहयोगी राणा समेत सात को गंवानी पड़ी कुर्सी

सत्ता संग्राम में न केवल राजभर को मंत्री पद गंवाना पड़ा बल्कि उनके पुत्र अरविंद राजभर और सहयोगी राणा अजीत प्रताप सिंह समेत सात लोगों को कुर्सी गंवानी पड़ी है। अरविंद और अजीत को राज्यमंत्री का दर्जा मिला था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजभर को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की सिफारिश के साथ ही आयोग, निगम और परिषद में नामित सुभासपा सदस्यों को भी बर्खास्त करने की सिफारिश कर दी। राज्यपाल राम नाईक ने यह सिफारिश मंजूर कर दी। इसके बाद उप्र लघु उद्योग निगम (यूपीएसआइसी) के अध्यक्ष अरविंद राजभर, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के अध्यक्ष व निदेशक राणा अजीत प्रताप सिंह, उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य गंगाराम राजभर व वीरेंद्र राजभर, उप्र पशुधन विकास परिषद के सदस्य सुदामा राजभर तथा राष्ट्रीय एकीकरण परिषद के सदस्य सुनील अर्कवंशी और राधिका पटेल को बर्खास्त कर दिया गया।

ध्यान रहे कि राजभर ने भाजपा से मोर्चा खोला तो उन्हें मनाने की भरपूर कोशिश हुई। पिछड़ा वर्ग आयोग में सदस्यों को नामित किये जाने के बाद राजभर ने नाराजगी जताई कि उनके प्रस्ताव पर एक भी व्यक्ति को नामित नहीं किया गया। इसके बाद भाजपा ने आयोग, परिषद और निगम में सुभासपा के सात लोगों को नामित किया था।

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ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ आई थी। इनकी पार्टी से चार विधायक हैं। इनमें से एक कैलाश सोनकर तो चंदौली से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पाण्डेय के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की राजभर समुदाय के बीच पकड़ मजबूत है। ओमप्रकाश राजभर की मांग थी कि लोकसभा चुनाव में उन्हें दो से तीन सीटें दी जाएं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

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लोकसभा चुनाव में राजभर ने भाजपा नेताओं पर जमकर हमला बोला और अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी किया। उल्लेखनीय है कि राजभर ने दावा किया कि वो और उनके दो सहयोगियों ने पहले ही इस्तीफा दे दिया था तथा उनका अब भाजपा से कोई रिश्ता नही रहा था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस्तीफा स्वीकार करना भाजपा सरकार का काम है।

राजभर ने तार-तार की गठबंधन धर्म की मर्यादा : भाजपा

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को योगी सरकार से बर्खास्त किये जाने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा है कि भाजपा गठबंधन धर्म निभाने व अपने सहयोगियों का पूरा सम्मान एवं भागीदारी करने वाला दल है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजभर ने हर कदम पर गठबंधन धर्म की मर्यादा का न केवल उल्लंघन किया बल्कि उसे तार-तार भी किया। इसलिए पार्टी और सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ दोनों को ही सख्त निर्णय लेने पर विवश होना पड़ा है।

सोमवार को डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि राजभर को बर्खास्त करने का योगी का फैसला स्वागत योग्य है, क्योंकि गठबंधन में रहते हुए उन्होंने लगातार भाजपा व सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए। सरकार की नीतियों का विरोध किया और उनके अनुपालन में बाधा उत्पन्न कर अपने सांविधानिक दायित्वों की भी धज्जियां उड़ाई।

डॉ. पांडेय ने कहा कि हमें उम्मीद थी कि राजभर समाज ने जिस तरह से निरंतर भाजपा का सहयोग और समर्थन किया है उससे उनके हित के लिए वह कार्य करेंगे लेकिन, वह अपने ही समाज के हित के लिए लागू की गई योजनाओं का भी विरोध करते रहे। राजभर ने अपने परिवार और निजी हित को ही प्राथमिकता दी। फिर भी भाजपा ने गठबंधन धर्म का निर्वाह करते हुए उनसे नाता बनाये रखा। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राजभर ने भाजपा की इस मर्यादा और सहनशीलता को हमारी कमजोरी समझ ली। उन्होंने लोकसभा चुनाव में न केवल भाजपा का विरोध किया बल्कि कई सीटों पर खुलकर विपक्ष का समर्थन किया। हमने संयम बनाये रखा लेकिन उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ अमर्यादित भाषा और गाली-गलौच का प्रयोग किया। डॉ. पांडेय ने चुनाव में सहयोग के लिए पूरे राजभर समाज के प्रति आभार जताया है।

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Posted By: Dharmendra Pandey