लखनऊ, जेएनएन। 'जहां सोच, वहां शौचालय...' की पंचलाइन के साथ शुरू हुए स्वच्छ भारत मिशन में फिक्र का एक साया भी साथ-साथ चला। गांव-शहरों को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) बनाने के लिए मैदान में उतरी मिशन टीम स्वीकार करती है, शौचालय बनाना तो आसान है, लेकिन व्यवहार परिवर्तन मुश्किल है।

शायद वह फिक्र जायज ही थी। आज जब सबसे तेज शौचालय निर्माण का पुरस्कार लिए उप्र इस दिशा में दौड़ता नजर आ रहा है, तब शौचालय उपयोग की ग्रामीणों की सोच कदमताल में कुछ हांफती-थकती महसूस होती है। इधर, सरकारी तंत्र में बैठे कुछ अफसरों की उदासीनता ने शौचालय निर्माण में धन के दुरुपयोग के भी कुछ धब्बे छोड़ दिए हैं।

बेसलाइन सर्वे 2012 के अनुसार प्रदेश में पात्र परिवारों की संख्या 2,49,29,775 है, जिनमें शौचालय युक्त परिवार 76,12,047 थे। 31 जनवरी तक लक्ष्य की पूर्ति कर ली गई थी। सर्वे में वंचित रहे अथवा बाद मेंं बढ़े 36 लाख से ज्यादा परिवारों को शौचालय उपलब्ध कराने का काम 31 मार्च तक पूरा कराने का दावा किया जा रहा है। देश में सर्वाधिक शौचालय निर्माण करने में उत्तरप्रदेश पुरस्कृत हो चुका है।

प्रदेश के सभी 75 जिलों को कागजों में ओडीएफ घोषित किया जा चुका है, परंतु जमीनी सच्चाई से भी मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है। जिला हापुड़ के गांव जनूपुरा के निवासी हुकुम सिंह का कहना है कि शौचालयों में पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उसके प्रयोग में मुश्किलें आती है, जिससे बचने के लिए ग्रामीण मजबूरन खेतों की राह पकड़ते हैं। शौचालय निर्माण भ्रष्टाचार की समस्या से अछूता नहीं रहा। पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों पर तत्परता बरती गई। दो दर्जन से अधिक कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है।

फोटो अपलोडिंग कार्य में पीछे

भारत सरकार के निर्देशानुसार निर्मित शौचालयों की फोटोग्राफी कराकर विभागीय वेबसाइट पर अपलोड कराना जरूरी है, जिसके तहत अब तक 1,51,14,658 शौचालयों की ही फोटोग्राफी कराकर उन्हें अपलोड किया जा सका है। निदेशक स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) आकाशदीप का कहना है कि जियो टैगिंग के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। एक दिन में 5,536 फोटो को अपलोड करने का काम किया जा रहा है।

8.87 लाख के सापेक्ष 8.47 लाख शौचालय निर्माण

शहरों में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण मामले में प्रदेश ने 95 फीसद लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। 8.87 लाख लक्ष्य के सापेक्ष 8.47 लाख शौचालयों का निर्माण हो गया है। साथ ही शहरों में 69 हजार सामुदायिक व सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त करने के लिए सरकार ने उन घरों में शौचालय बनवा दिए जिनके यहां यह सुविधा नहीं थी। इस कारण इन घरों की महिलाओं तक को शौचालय के लिए बाहर जाना पड़ता था। व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के मामले में प्रदेश के शहरी इलाकों में 8.87 लाख घरों में शौचालय निर्माण का लक्ष्य रखा था। इसका बड़ा हिस्सा प्राप्त कर लिया है।

स्वच्छ भारत मिशन के राज्य मिशन निदेशक अनुराग यादव ने बताया कि प्रदेश 653 नगरीय निकायों में से 370 निकाय ऐसे हैं जिन्हें खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया है। इन्हें क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया से भी ओडीएफ का प्रमाण पत्र मिल चुका है। उन्होंने बताया कि कुछ शहरों ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत बहुत अच्छा काम किया है।

Posted By: Umesh Tiwari