लखनऊ [नीरज मिश्र]। उत्‍तर प्रदेश में कास्मेटिक उत्पाद के बाजार में चीन को इस बार जोर का झटका लगा है। चीनी उत्पाद धीरे-धीरे करके बाजार से गायब हो रहे हैं। इसमें फेशियल किट, ब्यूटी क्रीम, लिपस्टिक, शेविंग किट, ट्रिमर, हेयर ब्रश, स्प्रे समेत तमाम तरह के सेंट अब बाजार से नदारद हो रहे हैं। जो बिक भी रहा है, वह बहुत पुराना माल है। व्यापारी बताते हैं कि कस्टम डयूटी बढऩे और सख्ती की वजह से बाजार में शृंगार से जुड़े नए चीनी उत्पादों की उपलब्धता कम हो गई है। वहीं इसकी भरपाई देसी और अन्य विदेशी कंपनियां आसानी से कर रही हैं। औसतन एक माह में 10 से 12 करोड़ का चीनी कारोबार राजधानी के बाजारों से होता था जो अब घटकर महज ढाई से तीन करोड़ का रह गया है।

सेंट और नोजल स्‍प्रे भी बाजार में नहीं: चीन के ब्यूटी मशीनें, क्रीम, सेंट के नोजल स्प्रे भी बाजार में मौजूद नहीं हैं। भारत में चीन के नोजल स्प्रे का बहुत बड़ा बाजार है। नोजल स्प्रे और डिजाइनर शीशियां सस्ती दरों पर कास्मेटिक के विभिन्न उत्पादों के काम आते थे। चीन का बाजार सिमटा है।

विनोद अग्रवाल, अध्यक्ष एफएमसीजी ट्रेडर्स एसोसिएशन व कास्मेटिक कारोबारी

त्योहारी सीजन में खपत बढ़ी: त्योहार शुरू हो गए हैं। करवाचौथ और सहालग निकट है। आने वाली सर्दियों को देखते हुए कास्मेटिक का ठंडा पड़ा बाजार गर्म हो उठा है। हर प्रोडेक्ट की डिमांड है। लोकल ही नहीं, जिलों से भी दुकानदार आ रहे हैं।

कीमतों में करीब 15 फीसद की वृद्धि: खपत बढऩे के साथ ही बाजार में कास्मेटिक के उत्पाद महंगे हो गए हैं। कारोबारियों के मुताबिक, करीब 15 फीसद रेट बढ़ा है। तेल, बॉडी लोशन आदि चीजों की मात्रा घटा दी गई है।

  • 150 से 200 करोड़ माह का राजधानी का कास्मेटिक कारोबार
  • 10 से 12 करोड़ का था पहले चीन का बाजार, अब ढाई से तीन करोड़ का

Edited By: Rafiya Naz