लखनऊ, जेएनएन। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साहित्य समाज का मार्गदर्शक होता है। साहित्य का अर्थ है, जिसमें सबका हित हो। साहित्य के माध्यम से ही हम किसी समाज, राष्ट्र व संस्कृति को संबल प्रदान कर सकते हैं। साहित्यकार को समाज की ज्वलंत समस्याओं को रचनात्मक दिशा देने का प्रयास करना चाहिए। जब हम अपनी लेखनी को खेमे, क्षेत्रीयता व जातीयता में बांटने का प्रयास करेंगे तो इससे साहित्यिक साधना भंग होगी। साथ ही समाज व देश का बड़ा नुकसान होगा।

मुख्यमंत्री ने सोमवार को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के 43वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित 'सम्मान समारोह' में कहा कि साहित्य को अपना जीवन समर्पित करने वाले महान साहित्यकारों को सम्मानित करना मेरे लिए गौरवपूर्ण है। साहित्य समाज का दर्पण होता है। इससे समाज की दिशा तय होती है। उन्होंने कहा कि हमारी लेखनी ऐसी होनी चाहिए जो मार्ग दर्शक के रूप में समाज को नई दिशा दे सके।

योगी ने कहा कि रचनात्मक साहित्य को बढ़ावा दिया जाए। रचनात्मक साहित्य के माध्यम से ही प्रगतिशील समाज की संकल्पना साकार हो सकती है। जो समाज अपनी विभूतियों को संरक्षित व संवर्धित करता है, वहीं समाज आगे बढ़ता है। हिंदी भारत को एक सूत्र में पिरोने वाली भाषा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में अपना उद्बोधन हिंदी में किया था। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हिंदी भाषा के जरिये न केवल दुनिया को भारत की ओर आकर्षित कर रहे हैं, बल्कि दुनिया को देश की ताकत का एहसास करा रहे हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 'पं दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान' से सम्मानित डा. ओम प्रकाश पाण्डेय द्वारा रचित पुस्तक 'सांस्कृतिक विचार की अविराम भारतीय यात्रा' का विमोचन किया। कार्यक्रम में विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, जलशक्ति मंत्री डॉ. महेन्द्र सिंह, हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सदानन्द प्रसाद गुप्त तथा निदेशक श्रीकान्त मिश्र सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

डॉ. ऊषा किरण खान को भारत-भारती सम्मान

मुख्यमंत्री ने डॉ. ऊषा किरण खान को 'भारत-भारती सम्मान' प्रदान किया। डॉ. मनमोहन सहगल को 'लोहिया साहित्य सम्मान' व डॉ. बदरी नाथ कपूर को 'हिन्दी गौरव सम्मान' प्रदान किया। हालांकि, डॉ. बदरी अस्वस्थ होने के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। सीएम ने भगवान सिंह को 'महात्मा गांधी साहित्य सम्मान' व डॉ. ओम प्रकाश पाण्डेय को 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान' से नवाजा। डॉ. कमल कुमार को 'अवंतीबाई साहित्य सम्मान' व मणिपुर हिंदी परिषद इंफाल के महासचिव डॉ. अरिबम्ब ब्रज कुमार शर्मा को 'राजर्षि पुरुषोत्तमदास टण्डन सम्मान' दिया गया। डॉ. उदय नारायण गंगू को 'प्रवासी भारतीय हिंदी भूषण सम्मान' व डॉ. बंडार मेणिके विजेतुंग को 'हिंदी विदेश प्रसार सम्मान' से सम्मानित किया गया।

श्रेष्ठ साहित्य का मंथन करके होता अच्छे समाज का निर्माण

डॉ. उषा किरण खान (पटना) : भारत भारती सम्मान (पांच लाख रुपये)

साहित्य मानव हितार्थ का सबसे सशक्त माध्यम है। साहित्यकार मानव संवेदनाओं को ग्रहण करता है और चिंतन मंथन के उपरांत प्रस्तुत करता है। श्रेष्ठ साहित्य का मंथन करके ही एक अच्छे समाज का निर्माण होता है। ऐसे कम ही साहित्यकार होते हैैं, जिनके साहित्य का अनुकरण समाज करता है। डॉ. उषा किरण ऐसी ही एक कथाकार हैैं। पद्मश्री एवं साहित्य अकादमी सम्मान से सम्मानित उषा किरण खान का जन्म 24 अक्टूबर 1945 को बिहार के दरभंगा में हुआ। पटना में ही मगध महिला कॉलेज से बीए और पटना विश्वविद्यालय से एमए व पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने संस्कृत, पाली, अंग्रेजी, ङ्क्षहदी, भाषाओं के प्राचीन साहित्य का अध्ययन किया है। इन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से हाशिये पर पड़ी स्त्रियों को मुख्यधारा से जोडऩे का सफल प्रयास किया है। इनकी अधिकतर रचनाओं का कथ्य समाज में व्याप्त लिंगभेद है। पहली कहानी इलाहाबाद से निकलने वाली यशस्वी पत्रिका में प्रकाशित हुई। इसके अलावा आपने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर भी भामती, सिरजनहार, और अगिन ङ्क्षहडोला जैसे उपन्यास लिखे हैैं। आपका भामती उपन्यास मैथिली साहित्य का प्रसिद्ध उपन्यास है, जिसके लिए आपको साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला है।

डॉ. मनमोहन सहगल (पंजाब) : लोहिया साहित्य सम्मान (चार लाख रुपये)

ख्याति प्राप्त आलोचक, समीक्षक, उपन्यासकार और बाल साहित्यकार डॉ. मनमोहन सहगल अपनी अनवरत साहित्य साधना से समसामयिक आलोचना-समीक्षा साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इनकी प्रकाशित कृतियों में 29 आलोचना, 21 उपन्यास, छह बाल साहित्य, पांच पंजाबी भाषा में, 12 अनुदित एवं पांच साहित्येतर रचनाएं प्रमुख हैं।

डॉ. बदरीनाथ कपूर (वाराणसी) : ह‍िंदी गौरव सम्मान (चार लाख रुपये)

डॉ. बदरीनाथ कपूर ह‍िंदी और पंजाबी भाषा के प्रति समर्पित साहित्यकार हैैं। डॉ. कपूर का जन्म 16 सितंबर को 1932 को पंजाब में हुआ था। 1957 से 1965 तक ङ्क्षहदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा प्रस्तुत मानक ङ्क्षहदी कोष में सहायक संपादक के रूप में कार्य किया है। इसके अलावा तीन साल (जापान) टोक्यो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर रहते हुए ङ्क्षहदी का प्रचार-प्रसार किया। (इनका सम्मान बेटे दीपक कपूर ने लिया।)

डॉ. श्रीभगवान सिंह (भागलपुर, बिहार) - महात्मा गांधी साहित्य सम्मान (चार लाख रुपये)

डॉ. श्रीभगवान सिंह ने अपना सारा साहित्यिक जीवन गांधीवादी विचारधारा को समर्पित किया है। आपकी प्रकाशित कृतियों में गांधी और दलित भारत जागरण, गांधी : एक खोज, गांधी और हमारा समय, तुलसी और गांधी, गांधी का साहित्य और भाषा चिंतन, गांधी और अंबेडकर, गांधी और ङ्क्षहदी साहित्य, गांधी के आश्रम संदेश प्रमुख हैं।

डॉ. ओम प्रकाश पांडेय (बाराबंकी) : पं. दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान (चार लाख रुपये)

डॉ. ओम प्रकाश पांडेय सजग, संवेदनशील साहित्यकार हैं। आपने काव्य और गद्य पर समान लेखनी चलाई है। डॉ. पांडेय नये 35 ङ्क्षहदी एवं 20 संस्कृत के मौलिक ग्रंथों की रचना की है। इसके अतिरिक्त संपादित, अनूदित और समीक्षात्मक कृतियों का सृजन भी किया है। इनके साहित्यिक अवदान को देखते हुए 2015 में राष्ट्रपति सम्मान भी मिला।

डॉ. कमल कुमार, दिल्ली : अवन्तीबाई सम्मान (चार लाख रुपये)

शहीदों की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए राष्ट्रीयता से ओतप्रोत एवं क्रांतिकारी ङ्क्षहदी साहित्य सृजन के लिए साहित्यकार डॉ. कमल कुमार को सम्मान मिला। आपकी अब तक 40 किताबेें छप चुकी हैैं। 

मणिपुर ह‍िंंदी परिषद, इंफाल : राजर्षि पुरुषोत्तम टंडन सम्मान (चार लाख रुपये)

संस्था पिछले कई दशकों से ङ्क्षहदी प्रचार-प्रसार के दायित्व का निर्वहन कर रही है। देश के अङ्क्षहदी भाषी प्रांतों/राज्यों में विगत दस वर्षों से ङ्क्षहदी पत्रिका/पुस्तकों का प्रकाशन, ङ्क्षहदी साहित्य पर केंद्रित साहित्यिक समारोहों व कार्यशालाओं का आयोजन एवं अनुवाद के माध्यम से ङ्क्षहदी के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई।

साहित्य भूषण सम्मान (दो लाख रुपये)

जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य (चित्रकूट) : 

ह‍िंंदी और संस्कृत के विद्वान, भारतीय दर्शन, अध्यात्म, व्याकरण के ज्ञाता, प्रख्यात कथावाचक, पुराणों के आधुनिक मीमांसाकार, प्रज्ञाचक्षु जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने वेदों, उपनिषदों, पुराणों एवं अन्य संस्कृत ग्रंथों का सम्यक अध्ययन किया है। अनेक ग्रंथ उन्हें कंठस्थ हैं। (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इनका सम्मान स्वयं लेते हुए कहा कि वह चित्रकूट जाकर उन्हें सम्मान देंगे।)

डॉ. बद्री प्रसाद पंचोली (अजमेर) : 1953 से लगातार लेखन। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे चुके हैं।

जगदीश तोमर (ग्वालियर)

आपने प्रेमचंद सृजन पीठ, उज्जैन के निदेशक पद को सुशोभित किया है।

श्री रामदेव लाल 'विभोर' (लखनऊ) :

अनूठी, सफल एवं सशक्त काव्य शैली के कारण विभोर जी की मुक्तक एवं प्रबंध दोनों प्रकार की काव्य रचनाएं पाठकों व श्रोताओं का कंठहार रही हैं।

डॉ. ऊषा चौधरी (लखनऊ) :

स्वतंत्रता सेनानी जगदीश प्रसाद - एक प्रेरक विभूति, बहता जीवन मुड़ती धारा, आस्था की किरण, अंजुरी भर सुगंध, मेरे गीत तुम्हारे नाम, आशीर्वाद की छाया में आदि के साथ ही 20 रचनाओं का सृजन।

सूर्यपाल सिंह (गोंडा) :

रंगकर्मी, नाटककार और नाट्य मंडली के संयोजक होने के साथ-साथ उत्कृष्ट व आधुनिक ढंग के कवि, गीतकार, गजलकार और छंदशास्त्र के अनुरागी भी हैं।

चंद्रिका प्रसाद कुशवाहा (उन्नाव) :

संस्कृत साहित्य में निहित लोकोपकारी तथ्यों से आम जन मानस को परिचित कराने के उद्देश्य से संस्कृत वाड्.मय की कई चर्चित काव्य कृतियों का ङ्क्षहदी में काव्यानुवाद किया है।

डॉ. आद्या प्रसाद प्रसाद द्विवेदी (गोरखपुर) :

प्रकाशित ग्रंथों में रंगलोक, लोक नर्तक बाबू नंदन, लोक साहित्य के सिद्धांत और भोजपुरी लेखन, नेह के नाते आदि प्रमुख हैं।

डॉ. श्याम सुंदर दुबे (मप्र) :

आप मप्र शासन के स्नातकोत्तर महाविद्यालय उच्च शिक्षा विभाग के प्राचार्य रहे हैं। मुक्तिबोध सृजनपीठ डॉ. हरी सिंह गौर विश्वविद्यालय के निदेशक पद को भी सुशोभित किया है।

डॉ. भगवान शरण भारद्वाज (बरेली) :

कर्मयोग है कर्मों द्वारा प्रभु की पूजा पुस्तक पर पुरस्कार मिला है।

वीरेंद्र आस्तिक (कानपुर) : नवगीतों के अतिरिक्त गद्य विधाओं में भी लेखनी चलाई है।

अशोक अग्रवाल (हापुड़) :

ह‍िंदी की प्राय: सभी महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में आपकी कहानियां, लेख, यात्रा वृत्तांत, संस्मरण, आलोचना निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं।

डॉ. शशि तिवारी (आगरा) :

काव्य, संगीत, अध्ययन, अध्यापन, लेखन, अभिनय, चित्रकला में रुचि रखने वाली डॉ. शशि ङ्क्षहदी, संस्कृत, उर्दू एवं ब्रज भाषा की विद्वान हैं।

डॉ. रामसनेही लाल शर्मा 'यायावर' (फीरोजाबाद) :

खड़ी बोली के अतिरिक्त यायावर जी की लेखनी ने ब्रजभाषा की समृद्धि में भी अपना योगदान दिया है।

प्रताप नारायण मिश्र (बाराबंकी) :

कौन बने शिव, महिमा भारतभूमि की, कृषक देवता आदि प्रमुख काव्य संग्रह हैं।

डॉ. इंदीवर (वाराणसी) :

शोध एवं समीक्षा ग्रंथ तुलसी का क्रांतिदर्शी कवि और जीवन खोज इनकी शोध दृष्टि का परिचायक है।

डॉ. सुरेश प्रकाश शुक्ल (लखनऊ) :

समकालीन कथा साहित्य के अग्रगण्य रचनाकार हैं। अब तक 32 मौलिक रचनाओं का सृजन किया है।

सुरेश बाबू मिश्र (बरेली) :

1984 से निरंतर लेखन व प्रकाशन में संलग्न सुरेश जी की कई कृतियां प्रकाशित हैं।

डॉ. पूरन चंद टंडन (दिल्ली) :

44 पुस्तकों एवं चार शब्दकोशों का प्रकाशन हो चुका है। 

Edited By: Anurag Gupta