लखनऊ, जेएनएन। दीपावली करीब है और मिलावट का बाजार तैयार है। तमाम कारोबारी मुनाफा कमाने के चक्कर में घटिया और मिलावटी सामान से उत्पाद तैयार कर बाजार में खपाने को तैयार हैं, जिन विभागों पर मिलावट रोकने की जिम्मेदारी है। महीनों तक उनकी लैब रिपोर्ट नहीं आती और तब तक गड़बड़ सामान बाजार मेें बिकता रहता है। ऐसे में कुछ आसान तरीके हैं, जिनसे रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों की गुणवत्ता को पहचाना जा सकता है। इसके अलावा घरेलू किट भी आती है। इससे मिलावट को आसानी से पहचाना जा सकता है।

खोया : दीपावली में सबसे अधिक डिमांड मिठाइयां बनाने के लिए खोया की होती है। खोये की डिमांड पूरी करने के लिए जमकर मिलावट हो रही है। ऐसे में खोया खरीदने से पहले उसकी जांच कर लें। आयोडीन की कुछ बूंद खोये पर डालें। अगर खोया काला या फिर बैगनी रंग का हो जाए तो उसमें स्टार्च, आलू या फिर शकरकंद की मिलावट हो सकती है।

पनीर : आजकल बाजार में सिंथेटिक और दूसरे कई तरह के पनीर सेहत और स्वाद खराब करने को तैयार हैं। सही पनीर की पहचान कैसे करें यह बड़ा सवाल है। नकली पनीर रबर की तरह खिंचता है। पनीर को पानी में डालकर ठंडा करें। उस पर टिंचर आयोडीन की कुछ बंूद डालें अगर वह नीला या बैगनी हो जाए तो वह नकली हो सकता है। 

दूध : त्योहारों पर वैसे भी सबसे अधिक दूध की डिमांड होती है। दूध से ही पनीर से लेकर तमाम मिठाइयां बनाई जाती हैं। डिमांड के अनुरूप दूध की उपलब्धता नहीं है। ऐसे में आपूर्ति के लिए दूध मेें तरह-तरह की मिलावट होती है। इसमें वनस्पति तेल से लेकर, यूरिया और फार्मोलीन पाउडर तक मिलाया जाता है। इससे बेहद गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। लिवर के लिए बेहद घातक है। दूध की पहचान करने के लिए टेस्ट टयूब में दूध लेकर गर्म करें और हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाएं। लाल रंग नजर आए तो वनस्पति तेल की मिलावट है। परखनली में दूध लेकर यूरियेज एंजाइम डालकर हिलाएं और पांच बूंद पोटेशियम कार्बोनेट मिलाकर फिल्टर पट्टी पर कार्क से ढकें। फिल्टर पेपर का रंग यदि पहले लाल फिर हरा हो जाए तो यूरिया की मिलावट हो सकती है।

हल्दी : खपत पूरी करने के लिए हल्दी में भी जमकर मिलावट होती है। बीते दिनों छापों के दौरान बड़ी मात्रा में घटिया हल्दी बरामद हुई। इसमें हानिकारक मैटानिल यलो रंग की मिलावट होती है, जिससे कैंसर तक हो सकता है। इसकी जांच के लिए परखनली लेकर स्प्रिट की कुछ बूंद डालें रंग गुलाबी या बैगनी हो जाए तो मिलावट है।

लाल मिर्च : इसमें रंग देने के लिए खतरनाक सूडान कलर का इस्तेमाल हो रहा है। बीते दिनों राधेलाल स्वीट्स के यहां नमूनों में इसकी पुष्टि हुई। पहले भी कई बार इसकी पुष्टि हो चुकी है। लाल मिर्च को पानी में मिलाकर हिलाएं इसमें अगर ईंट पाउडर की मिलावट होगी तो नीचे बैठ जाएगा।

धनिया : धनिया में अधिकतर मिट्टी और बुरादा मिलाया जाता है। परखनली में पानी के ऊपर चुटकी भर धनिया डालेंगे तो बुरादा पानी के ऊपर तैरने लगेगा।

काली मिर्च : इसमें पपीते के बीज मिलाए जाते हैं। किसी गिलास में पानी डालकर साबूत काली मिर्च नीचे बैठ जाती है पपीते के बीज ऊपर तैरने लगते हैं।

चीनी : चीनी में चॉक पाउडर की मिलावट होती है। चीनी को पानी में घोलने पर चॉक पाउडर नीचे बैठ जाता है। इससे मिलावट का पता चल सकता है।

लैब रिपोर्ट में लग जाते हैं दो से तीन महीने

एफएसडीए द्वारा भेजे गए नमूनों की जांच में न्यूनतम दो से तीन महीने लग जाते हैं। नियमावली के मुताबिक तो जांच रिपोर्ट 15 दिनों में आनी चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है। पांच ही लैब हैं जिनमें पूरे प्रदेश के नमूनों की जांच होती है। वहां विशेषज्ञों की भी कमी है और सरकारी तंत्र के दांव पेच के चलते जल्द रिपोर्ट बाहर नहीं आ पाती। 

Posted By: Anurag Gupta

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