लखनऊ, जेएनएन। Chinmayanand Case : एलएलएम छात्रा से दुष्कर्म के मामले में आरोपित पूर्व मंत्री चिन्मयानंद उर्फ कृष्णपाल के खिलाफ चार मार्च को आरोप तय हो सकता है। बुधवार को चिन्मयानंद एमपीएमएलए कोर्ट में हाजिर हुए। इस दौरान आरोपित की ओर से आरोपों से मुक्त करने की अर्जी देने के लिए 15 दिन का समय देने की मांग की गई। इस पर विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने समय देने से इन्कार करते हुए मामले की सुनवाई के लिए चार मार्च की तारीख तय की।

आरोपित की ओर से अर्जी देकर बताया गया कि वह इस मामले में आरोपों से मुक्त करने की मांग वाली अर्जी देना चाहता है, लेकिन फाइल बहुत बड़ी है। इसके साथ ही उसे निचली अदालत से सभी आवश्यक दस्तावेज की नकल नहीं दी गई है और फाइल का अवलोकन भी ठीक से नहीं किया गया है। लिहाजा उन्मोचन अर्जी तैयार नहीं की जा सकी है। ऐसे में अर्जी तैयार करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाए। कोर्ट ने अर्जी पर सुनवाई के बाद चार मार्च की तारीख तय करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने मामले में आरोपित को जमानत देते हुए आदेश दिया है कि आरोपित के जमानत पर रिहा होने के एक साल के भीतर सुनवाई पूरी कर ली जाए। लिहाजा अगर आरोपित उन्मोचन अर्जी देना चाहता है तो वह तारीख से पहले या तारीख के दिन ही दे सकता है। इसके बाद उन्मोचन अर्जी देने का अवसर नहीं दिया जाएगा और आरोपित पर आरोप तय किए जाएंगे। 

ये है मामला 

गौरतलब है कि 27 अगस्त 2019 को एलएलएम छात्रा के पिता और वादी ने शाहजहांपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराकर चिन्मयानंद को आरोपी बनाया था। आरोप है कि आरोपित के कॉलेज से एलएलएम कर रही बेटी का मोबाइल फोन 23 अगस्त से बंद है। फेसबुक वीडियो देखने पर पता चला कि कॉलेज प्रबंधक चिन्मयानंद और अन्य लोगों ने छात्रा का शारीरिक शोषण, दुष्कर्म और जानमाल की धमकी दी है। इस मामले में चिन्मयानंद को जेल भेजा गया और हाईकोर्ट ने आरोपित को तीन फरवरी को जमानत देते हुए मामले की सुनवाई के लिए पत्रावली को शाहजहांपुर से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था।

छात्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

समाज में बदनाम करने की धमकी देकर चिन्मयानंद से पांच करोड़ की अवैध मांग करने की आरोपित विधि छात्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। एमपीएमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने बुधवार को यह निर्देश देते हुए सुनवाई की अगली तारीख चार मार्च तय की है। कोर्ट की ओर से आरोपित के जमानतदारों को भी नोटिस भेजने के निर्देश दिए हैं।

इससे पहले कोर्ट में इस मामले के आरोपित संजय सिंह, डीपी सिंह, विक्रम सिंह और सचिन हाजिर हुए, जबकि अजित सिंह की हाजिरी माफी की अर्जी दी गई। वहीं आरोपित विधि छात्रा न तो हाजिर हुई और न ही उसकी तरफ से हाजिरी माफ की अर्जी ही दी गई। इस पर कोर्ट ने आरोपित के खिलाफ वारंट और जमानतदारों के खिलाफ नोटिस जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकरण का न्यायालय ने छह नवंबर 2019 को संज्ञान लिया था, लेकिन आरोपितों की गैरहाजिरी के चलते अभी तक उनपर आरोप तय नहीं किए जा सके हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि ऐसे मामलों का निस्तारण तेजी से किया जाए।

पांच करोड़ रुपये की मांग करते दी थी धमकी 

पत्रावली के अनुसार वादी ओम सिंह ने 25 अगस्त 2019 को शाहजहांपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह मुमुक्षु आश्रम का विधिक कार्य करते हैं। मोबाइल फोन पर अज्ञात व्यक्ति ने पांच करोड़ रुपये की मांग करते हुए धमकी दी है कि रुपये की व्यवस्था नहीं हुई तो समाज में बदनाम कर देंगे और वीडियो को वायरल कर देंगे, जिससे छवि खराब होगी। पुलिस ने मामले की विवेचना के बाद आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। वहीं हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई को शाहजहांपुर से लखनऊ स्थानांतरित किया था।

Posted By: Divyansh Rastogi

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस