v>लखनऊ (जेएनएन)। विधान परिषद में मंगलवार को सभापति रमेश यादव ने सरकर को नोएडा में जिम ट्रेनर जितेंद्र यादव को दारोगा द्वारा गोली मारने, शिव कुमार यादव की हत्या और ग्रेटर नोएडा में सुमित गुर्जर एनकाउंटर के तीन मामलों की सीबीआइ से जांच कराने का निर्देश दिया। सपा और कांग्रेस ने इन मामलों को उठाते हुए प्रदेश में ध्वस्त कानून व्यवस्था और कथित फर्जी मुठभेड़ संस्कृति पर काम रोक कर चर्चा कराने की मांग की थी। सरकार का पक्ष रखते हुए ग्राम्य विकास मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) महेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि सरकार इन सभी मामलों की मजिस्ट्रेट से जांच करा रही है, लेकिन सभापति ने विपक्ष की मांग को मानते हुए इन तीन मामलों की सीबीआइ से जांच कराने का निर्देश दिया। 

सपा ने उठाया फर्जी पुलिस मुठभेड़ मामला 
सपा के आनंद भदौरिया ने प्रदेश में फर्जी पुलिस मुठभेड़ों का मामला उठाया। उन्होंने तीन फरवरी को नोएडा में जिम ट्रेनर जितेंद्र यादव को पुलिस उप निरीक्षक द्वारा सर्विस रिवाल्वर से गोली मारने की घटना का उल्लेख किया। ग्रेटर नोएडा में चार अक्टूबर को सुमित गुर्जर एनकाउंटर का जिक्र करते हुए कहा कि सुमित और उसके परिवारीजन पर कोई मुकदमा न होने पर भी पुलिस ने निर्ममता से उसकी हत्या कर दी। मथुरा के मोहनपुर मडूकी गांव में पुलिस फायरिंग में आठ साल के बच्चे माधव की मृत्यु और इसी जिले में अलग-अलग पुलिस मुठभेड़ों में कासिम और राजू लोधी की मौत को भी उन्होंने फर्जी एनकाउंटर करार दिया। सपा के ही जितेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि उप्र में प्रमोशन पाने के लिए पुलिसकर्मी फर्जी एनकाउंटर कर रहे हैं। प्रदेश में जाति के नाम पर हत्याएं हो रही हैं। उन्होंने और सपा के नरेंद्र भाटी ने पिछले साल 16 नवंबर को नोएडा के गढ़ी बहलोलपुर गांव के निवासी शिव कुमार यादव की हत्या का भी जिक्र किया। शिव कुमार भाजपा के मंडल अध्यक्ष थे। सपा के संजय लाठर ने कहा कि अब तक प्रदेश में फर्जी एनकाउंटर के 1142 सामने आये हैं जिनमें 34 लोगों की मौत हुई और 265 घायल हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद इनमें से एक की भी मजिस्ट्रेटी जांच नहीं हुई है। 
नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन ने कहा कि मुख्यमंत्री के इतना कहते ही कि'गोली का जवाब गोली से देंगे, पुलिस बेगुनाहों को मारने लगी है।
फर्जी एनकाउंटर उप्र के लिए अच्छा शगुन नहीं 
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण के पेट्रोल पंप पर बदमाशों द्वारा गोली चलाने और लूटपाट करने और मंत्री के रिश्तेदार की हत्या की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को शर्म आनी चाहिए। फर्जी एनकाउंटर से बदमाश नहीं, शरीफ लोग भयभीत हैं। यह उप्र के लिए अच्छा शगुन नहीं बल्कि खतरनाक इशारे हैं। सरकार सत्ता के नशे में चूर है। कांग्रेस के दिनेश प्रताप सिंह ने सवाल किया कि यदि प्रमोशन पाने के लिए पुलिसकर्मी किसी की हत्या करते हैं तो इसके लिए दोषी कौन है? 
सरकार का अपराधी सफाये का संकल्प 
ग्राम्य विकास मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) महेंद्र सिंह ने विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए कहा कि कहा कि नोएडा में जिम ट्रेनर पर प्रशिक्षु पुलिस उप निरीक्षक ने गोली चलायी थी। उसे जेल भेजा गया है, घटना में शामिल तीन कांस्टेबल निलंबित कर दिये गए हैं, मामले की जांच चल रही है। सरकार ने इस घटना को कभी पुलिस मुठभेड़ नहीं कहा। सलीम गुर्जर समेत अन्य मुठभेड़ों की भी मजिस्ट्रेटी जांच कराये जाने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने पर वह सदन को उसकी रिपोर्ट दे देंगे। उन्होंने बताया कि मथुरा में बदमाशों के साथ क्रास फायङ्क्षरग के बीच में आ जाने के कारण माधव नामक बच्चे की जान गई। विपक्ष पर पलटवार किया कि सपा शासनकाल में दंगों की आग में झुलस रहे उप्र में जंगलराज कायम था। उन्होंने प्रदेश से अपराधियों के सफाये का सरकार का संकल्प दोहराया। 
अपराध के आंकड़ों पर भी हुई बहस
बहस के दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए ग्राम्य विकास मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि 2016-17 की तुलना में 2017-18 में अपराधों में 42 फीसद की कमी आयी है। डकैती की घटनाओं में 5.7 प्रतिशत, हत्या में 3.5 प्रतिशत, फिरौती के लिए अपहरण में 13.21 प्रतिशत की कमी आयी है। वर्ष 2016 में त्योहारों पर 100 आपराधिक घटनाएं हुई थीं जबकि 2017 में सिर्फ झड़प की आठ घटनाएं हुईं। वहीं नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन ने कहा कि 2016 में सपा शासनकाल में अपराधों की संख्या 32954 थी जो 2017 में योगी राज में बढ़कर 46352 हो गई। 
मुठभेड़ में मारे 39 बदमाश
ग्राम्य विकास मंत्री ने सदन को बताया कि इस साल मुठभेड़ की 1195 घटनाएं हुईं जिनमें 2835 बदमाश गिरफ्तार, 303 घायल और 39 मारे गए। इन मुठभेड़ों में 257 पुलिसकर्मी घायल और चार शहीद हुए। वहीं गिरफ्तारी के लिए 1861 बदमाशों पर इनाम घोषित किया गया। 
चीन की आठ कंपनियों में से एक भी काम करने को तैयार नहीं
सपा के नरेंद्र भाटी ने कहा कि नोएडा में चीन की आठ कंपनियां आयी हैं, लेकिन वहां दहशत और अराजकता के माहौल के कारण इनमें से एक भी काम करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नोएडा से होने वाली सारी उगाही जेलों में बंद माफिया के पास पहुंच रही है।

By Nawal Mishra