लखनऊ, जेएनएन। देवरिया में नारी संरक्षण गृह में बालिकाओं के उत्पीड़न व सेक्स रैकेट संचालित करने के मामले में सीबीआइ ने करीब एक साल बाद अलग-अलग दो केस दर्ज किए हैं। सीबीआइ लखनऊ की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने देवरिया में दर्ज कराई गई दो एफआइआर को अपने केसों का आधार बनाया है, जिनमें मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण व समाज सेवा संस्थान की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी व उनकी बेटी संरक्षण गृह की अधीक्षिका कंचनलता नामजद आरोपित हैं।

संरक्षण गृह में अनियमितताएं सामने आने के बाद सरकार ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लिया था। अगस्त 2018 में तत्कालीन जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) प्रभात कुमार की ओर से संरक्षण गृह संचालिका व अन्य के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई गई थी। संचालिका गिरिजा त्रिपाठी व उनकी बेटी समेत अन्य पर मानव तस्करी, यौन शोषण, ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारी के निर्देशों का पालन न करने, मानकों के विपरीत बच्चों को गोद देने, यौन हमले, आपराधिक धमकी समेत अन्य गंभीर आरोप थे।

सीबीआइ ने इस एफआइआर को आधार बनाकर आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट व किशोर न्याय अधिनियम समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। इसके अलावा देवरिया कांड में डीपीओ प्रभात कुमार की ओर से ही गिरिजा त्रिपाठी व उनकी बेटी कंचनलता के खिलाफ सरकार कार्य में बाधा डालने व हमला करने का दर्ज कराया था। आरोप था कि पांच अगस्त 2018 को मां-बेटी ने डीपीओ और उनके साथ आए पुलिस अधिकारियों व जांच टीम को संरक्षण गृह में घुसने से रोका और हमला किया। सीबीआइ ने इस एफआइआर को आधार बनाकर अपना दूसरा केस दर्ज किया है। दरअसल, राज्य सरकार ने नौ अगस्त 2018 को केंद्र सरकार से देवरिया कांड की सीबीआइ जांच कराने की सिफारिश की थी। सीबीआइ ने आरंभिक जांच में अहम तथ्य जुटाये और एक साल बाद अब दो एफआइआर दर्ज कर ली हैं। सीबीआइ अब दोनों केसों की विवेचना शुरू करेगी।

Posted By: Umesh Tiwari

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