लखनऊ [जागरण संवाददाता]। पुलिस आरक्षी, ए आरक्षी, फायरमैन और पीएसी के आरक्षित सामान्य पदों पर महिला अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के मामले में सोमवार को अभ्यर्थियों ने बड़ी संख्या में राजधानी स्थित बापू भवन के पास स्थित पुलिस भर्ती बोर्ड दफ्तर का घेराव कर लिया। एकजुट होकर पहले अभ्यर्थियों ने आकाशवाणी के सामने धरना किया। साथ ही सामान्य सीटों पर एससी/एसटी और ओबीसी की महिला अभ्यर्थियों को हटाकर रिक्त हुए पदों पर दोबारा से पुरुष अभ्यर्थियों को चयनित करने की माग की।

इसी बीच अभ्यर्थी अपनी आवाज बुलंद करने के लिए मेट्रो मशीनों पर चढ़ गए। वहीं, मौके पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की तो अभ्यर्थी मानने को तैयार नहीं हुए। आगे बढ़ते हुए भाजपा कार्यालय को भी घेरने का प्रयास किया, इसपर सुरक्षाकर्मियों ने हल्का बल प्रयोग कर अभ्यार्थियों को खदेड़ा। तीखीं बहस बाजी के बाद सभी अभ्यर्थी लक्षण मेला पार्क रवाना हो गए। क्या कहना है अभ्यर्थी का?

अभ्यर्थी अर्जुन ने बताया कि सामान्य वर्ग में कुल आरक्षित सीट 3550 में से केवल 20 फीसदी ही सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित थे। सामान्य वर्ग की महिला के न होने पर इन पदों को पुरुष अभ्यर्थियों से भरा जाना था, लेकिन मनमानी के चलते इन पदों पर एससी/एसटी और ओबीसी की महिला अभ्यर्थियों को चयनित कर पुरुष अभ्यर्थियों के साथ धोखा किया गया। अगर, पदों को खाली कराकर पुरुष अभ्यर्थियों को चयनित नहीं किया गया तो सभी अभ्यर्थी मिलकर आदोलन करेंगे। क्या है पूरा मामला ?

उत्तर प्रदेश में 2013 में 41610 सिपाही भर्ती शुरू हुई थी। जिसमे सामान्य वर्ग में क्षैतिज आरक्षण के तहत कुल 3550 सामान्य वर्ग की महिलाओं का चयन होना था, लेकिन चयन के लिए सिर्फ 1997 महिलाएं ही मिल सकी । 1997 सामान्य वर्ग की महिलाओं को नियुक्ति भी दे दी गई, लेकिन बाकी बचे 1553 पदों पर ओबीसी और एससी वर्ग की महिलाओं को नियुक्ति दी गई । इसी नियुक्ति को हाईकोर्ट में चैलेंज किया गया था और दलील दी गई थी कि नियमानुसार जिस वर्ग की महिला अभ्यर्थी होंगी उसको उसी वर्ग में क्षैतिज आरक्षण मिलेगा। ऐसे में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग के क्षैतिज आरक्षण में नियुक्ति देना गलत है ।

कोर्ट ने रद्द की थी नियुक्ति

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान 5 नवंबर 2017 को सामान्य वर्ग के क्षैतिज आरक्षण में आरक्षित कोटे की महिलाओं की नियुक्ति रद्द कर दी थी और सामान्य वर्ग की रिक्त हुई सीटों को सामान्य अभ्यर्थियों से भरने का आदेश दिया था। कोर्ट ने आरक्षित कोटे की महिलाओं को उनके ही वर्ग में नियुक्ति देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में यह साफ कर दिया था कि सामान्य वर्ग में क्षैतिज आरक्षण लागू होने के बाद अगर सीटे खाली रहती हैं तो उन सभी सीटों को सामान्य अभ्यर्थियों से भरा जाये।

Posted By: Jagran