राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सपा और बसपा शासनकाल के दस वर्ष शराब कारोबारियों के लिए मौज भरे रहे। सरकारों की शह, आबकारी विभाग की अव्यावहारिक और गलत नीतियों का परिणाम रहा कि शराब कारोबारियों ने तो उपभोक्ताओं की जेब से तो हजारों करोड़ रुपये की अनुचित कमाई की। वहीं, सरकार का राजस्व बढऩा तो दूर, अन्य प्रदेशों की तुलना में यहां महंगी शराब और अन्य अनियमितताओं से सरकारी खाते को 24805.96 करोड़ की क्षति पहुंची।

नियंत्रक महालेखापरीक्षक (CAG) ने राज्य की 2008 से 2018 तक की आबकारी नीतियों का अध्ययन कर इस दौरान हुई अनियमितताओं और क्षति का आकलन किया है। शुक्रवार को जारी की गई रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि 2008 से 2018 तक तत्कालीन सरकारों ने डिस्टलरी और ब्रेवरी संचालकों को विदेशी मदिरा और बीयर की कीमत मनमाने ढंग से तय करने की अनुमति दी। पड़ोसी राज्यों की तुलना में 46 से 135 फीसद तक महंगी शराब-बीयर बेची गई। इसके चलते डिस्टलरी और ब्रेवरी संचालकों ने इन दस वर्षों में 5525.02 करोड़ रुपये का अनुचित कमाई की।

वहीं थोक और फुटकर विक्रेताओं ने 1643.61 करोड़ रुपये का गलत तरीके से लाभ हुआ। सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में यहां उपभोक्ता शराब-बीयर का अधिक मूल्य चुका रहे थे। ऐसे में सरकारें मार्जिन को देखने हुए आबकारी शुल्क बढ़ाकर राजस्व बढ़ा सकती थीं। यही नहीं, इस गलत नीति को ही प्रदेश में शराब की तस्करी बढऩे का कारण भी माना गया है। वहीं, योगी सरकार में अप्रेल 2018 से जनवरी 2019 के दौरान आबकारी राजस्व में 47.84 फीसद की अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

दस साल में एक गलती न पकड़ सका आबकारी विभाग

आसवनियों द्वारा 2008 से 2018 के बीच विदेशी मदिरा की माप 187.50 एमएल और 93.75 एमएल रखी गई। वहीं, आबकारी आयुक्त शुल्क की गणना 180 एमएल और 90 एमएल की दर से करते रहे। दस वर्ष में यह गलती न पकड़े जाने से 227.98 करोड़ के आबकारी शुल्क का नुकसान सरकार को हुआ। इसी तरह देशी शराब की तरह आबकारी विभाग द्वारा विदेशी शराब और बीयर के उठान का एमजीक्यू निर्धारित न किए जाने से 13246.97 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व की हानि बताई गई है।

Posted By: Umesh Tiwari

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