लखनऊ, जेएनएन। वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल इस बार बजट भाषण पढऩे आए तो आत्मविश्वास से भरे-पूरे थे। विपक्ष पर हमलावर होने की बजाय इस बार वह अपनी उपलब्धियों पर ही केंद्रित थे। बार-बार यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि जो ठान लिया उसे पूरा किया। कुंभ के बखान और गर्व की अनुभूति के साथ ही उन्होंने बजट भाषण की शुरुआत की तो प्रोफेसर वसीम बरेलवी की पंक्तियां उनकी साझीदार बनीं-

'हवा का रुख बदल देने का हौसला भी है ताकत भी, 

निभाते हैं, अगर कोई भी वादा कर लिया हमने। 

सफर अपना किसी तूफान के डर से नहीं रुकता, 

इरादा कर लिया तो फिर, इरादा कर लिया हमने।'

अग्रवाल यह शेर पूरा कर भी नहीं पाये कि विपक्ष में बैठे सपा सदस्य संग्राम सिंह यादव तेजी से बोल पड़े वसीम बरेलवी सपा के एमएलसी हैं। उधर, सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाई और उत्साह का एक अलग ही माहौल बन गया। राजेश अग्रवाल 2017 में जब बजट पढ़ रहे थे तो उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और बजट भाषण संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने पूरा किया। 2018 के बजट भाषण में राजेश अग्रवाल विपक्ष पर हमलावर थे और तब यह शेर पढ़ा था - 

'हमारा वादा है हर घर को जगमगाएंगे

दीयों की लौ को हवाओं से हम बचायेंगे।

स्वर्ग उतरेगा एक रोज अपनी धरती पर  

जो कोई कर नहीं पाया, वो कर दिखायेंगे।'

एक वर्ष की इस अवधि में उनका आत्मविश्वास चेहरे पर भी था और शब्दों में भी। इसलिए वह लगातार उपलब्धियां ही गिनाते रहे। कुंभ के बखान के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को श्रेय देना भी नहीं भूले। अग्रवाल ने योगी को समर्पित शेर पढ़ा - 

'जब इरादा बना लिया ऊंची उड़ान का, 

फिर देखना फिजूल है, कद आसमान का।'

अग्रवाल इस बार उपलब्धियों का आंकड़ा गिनाते हुए नरेंद्र मोदी के सबसे खास नारे 'सबका साथ-सबका विकास' पर ठहर गये। इसको जमीन देने के लिए अपनी भावनाओं को व्यक्त किया - 

'सभी का साथ न होता हमारा धर्म, तो फिर, 

हम एक दरिया से, छोटी सी झील हो जाते।'

सत्ता पक्ष के सदस्य बीच-बीच में मेज थपथपाकर उनका उत्साहवद्र्धन कर रहे थे। विपक्ष की ओर से कोई टीका-टिप्पणी नहीं थी। राजकोषीय सेवाओं के विवरण प्रस्तुत करने से पहले राजेश अग्रवाल ने कहा- 

'हम ऐसा दरिया हैं जो एक-एक कतरे का, 

कोई भी मांग ले, सारा हिसाब दे देंगे।' 

वह पूरी तरह यह जताने की कोशिश कर रहे थे कि उनके खजाने में पारदर्शिता भरी है। समापन तक आते-आते भी विपक्ष पर कोई हमला नहीं बोले लेकिन, अपनी ही तारीफ के जरिये निशाना साध लिए। अग्रवाल ने कहा 'हमने घोटालों, घपलों और भ्रष्टाचार से मुक्त सरकार दी है। उस अमावस के अभेद्य अंधकार को हमने अपनी पूर्णिमा की उज्ज्वलता से समाप्त किया है। अपने कालजयी पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के विचार 'कंधे से कंधा लगाकर, कदम से कदम मिलाकर हमें अपनी जीवन यात्रा को ध्येय सिद्धि के शिखर तक ले जाना है' का अनुसरण कर रहे हैं। और बजट पेश करते हुए उन्होंने फिर एक शेर से समापन किया- 

'लहरों को साहिल की दरकार नहीं होती, 

हौसला बुलंद हो तो कोई दीवार नहीं होती, 

जलते हुए चिराग ने आंधियों से ये कहा, 

उजाला देने वालों की कभी हार नहीं होती।'

निसंदेह अग्रवाल की इन पंक्तियों में 2019 में होने जा रहे लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा का अति आत्मविश्वास झलक रहा था। 

प्रदेश की जनता को दोगुना मूर्ख बनाया 

राजेश अग्रवाल की 2017 में तबीयत बिगडऩे पर नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने तब कटाक्ष किया था। इस बार अग्रवाल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने बहुत कटाक्ष किया लेकिन, मैं उनके स्वास्थ्य की कामना करता हूं कि उनकी बुलंद आवाज गूंजे। राम गोविंद ने कहा कि डॉक्टर ने मुझे कहा है कि ज्यादा और ऊंची आवाज में मत बोलिये लेकिन, मैं बोलूंगा क्योंकि जितना केंद्र के बजट में देश की जनता को मूर्ख बनाया गया, उसका दोगुना आपने प्रदेश की जनता को मूर्ख बनाया है। 

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