लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट प्रावधानों के जरिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की जमीन काफी मजबूत करने की कोशिश की। बजट में काशी, अयोध्या और मथुरा के लिए दरियादिली, बौद्ध परिपथ और अन्य धार्मिक स्थलों के लिए उदारता दिखाकर इस रंग को और गाढ़ा कर दिया है। प्रयागराज में ऋषि भारद्वाज आश्रम एवं श्रृंगवेरपुर धाम, विंध्याचल एवं नैमिषारण्य का विकास, बौद्ध परिपथ में सारनाथ, श्रावस्ती, कुशीनगर, कपिलवस्तु, कौशांबी एवं संकिसा का विकास, शाकुंभरी देवी एवं शुक्रताल विकास, राजापुर चित्रकूट में तुलसी पीठ विकास, बहराइच में महाराजा सुहेलदेव स्थल एवं चित्तौरा झील का विकास तथा लखनऊ में बिजली पासी किले का विकास किया जाना प्रस्तावित है। 

गढ़ मुक्तेश्वर में पर्यटन स्थलों का विकास 

बजट में धर्म-अध्यात्म और संस्कृति पर सदाशयता के साथ केंद्र और प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी की तस्वीर बदलने के लिए तत्पर दिखी। वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर विस्तार के लिए 207 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में वैदिक विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 16 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई। मथुरा-वृंदावन के मध्य आडिटोरियम के निर्माण के लिए आठ करोड़ 38 लाख रुपये का बजट है। रामलीला स्थलों में चहारदीवारी निर्माण के लिए पांच करोड़, वृंदावन शोध संस्थान के लिए एक करोड़ और बृज तीर्थ में अवस्थापना सुविधाओं के लिए 125 करोड़ रुपये का प्रावधान है। बजट में अयोध्या के प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास के लिए 101 करोड़ और अयोध्या में एयरपोर्ट के लिए 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गढ़ मुक्तेश्वर के पर्यटन स्थलों के विकास के लिए भी 27 करोड़, पर्यटन नीति के क्रियान्वयन के लिए 70 करोड़ और प्रो-पुअर टूरिज्म के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 

Posted By: Nawal Mishra

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