रेलकर्मियों की सुविधाओं पर आड़े आ रहा बजट, ओवरटाइम समेत अन्य भत्तों का नहीं हो रहा भुगतान
Indian Railways: लखनऊ मंडल में कर्मचारियों की कमी से न तो साप्ताहिक दो विश्राम दिया जा रहा है, और न ही ओवरटाइम का भुगतान हो रहा है।

रेलवे में छाया बजट का संकट, यूनियनों ने उठाया मुद्दा
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भारतीय रेलवे में छाया बजट का संकट, यूनियनों ने उठाया मुद्दा
मंडल प्रशासन को पत्र भेजने पर जवाब मिला कि बकाया भुगतान का फंड ही खत्म
जागरण संवाददाता, लखनऊ : किसी भी हादसे में रेलवे जिस दुर्घटना राहत ट्रेन (एआरटी) को सबसे पहले मौके पर रवाना करता है, उस ट्रेन में तैनात ट्रैकमैनों को पिछले कई माह से ब्रेक डाउन एलाउंस नहीं मिला है। अनुभाग की ओर से मंडल प्रशासन को पत्र भेजने पर जवाब मिला कि बकाया भुगतान का फंड ही खत्म है।
इंजीनियरिंग की तरह ही रेलवे के विद्युत (रोलिंग स्टाक), परिचालन, सिग्नल व टेलीकाम सहित सभी संवेदनशील अनुभागों के रेलकर्मियों के बकाए एरियर के भुगतान पर रोक लग गई है। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के अधीन ही करीब 1800 रेलकर्मियों के एलाउंस का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
ग्रुप सी व ग्रुप डी के कर्मचारियों को स्टाफ बेनीफिट फंड से प्रतिवर्ष टेक्निकल एजुकेशनल स्कालरशिप जारी होती है। पिछले वर्ष तक फंड के संकट के कारण इस स्कालरशिप के भुगतान में देरी हुई। इस वर्ष अब तक यह स्कालरशिप जारी नहीं हो सकी है।
इसी तरह नवनियुक्त लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर जैसे रनिंग कर्मचारियों लाइन बक्सा भत्ता नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं 15 वर्ष की सेवा के उपरांत भी बक्सा बदलने का भत्ता मिलता है, इस पर भी रोक लग गई है। मंडल में सबसे अधिक बकाया इंजीनियरिंग अनुभाग के कर्मचारियों का है।
गेटमैन, केयरटेकर, चौकीदार व अन्य कर्मचारियों को नियम के तहत सप्ताह में दो विश्राम देने और कर्मचारियों की कमी के कारण दो विश्राम न देने की दशा में 12 घंटे का साप्ताहिक ओवरटाइम का भुगतान करने का आदेश रेलवे बोर्ड ने दिया है। लखनऊ मंडल में कर्मचारियों की कमी से न तो साप्ताहिक दो विश्राम दिया जा रहा है, और न ही ओवरटाइम का भुगतान हो रहा है।
उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन लगातार रेलवे प्रबंधन के साथ होने वाली स्थाई वार्ता तंत्र की बैठक में कर्मचारियों के बकाए भत्तों के भुगतान की मांग उठा रही है। यूनियन के पदाधिकारी हरजिंदर सिंह कहते हैं कि मंडल प्रशासन के पास एलाउंस की मद का फंड खत्म हो गया है। भुगतान कई माह से रुका हुआ है। पूर्वोत्तर रेलवे में भी आठ की जगह 12 घंटे काम करने वाले ट्रैकमैनों का कई माह से ओवरटाइम का भत्ता बकाया है।
