लखनऊ, जेएनएन। बीते लगभग दो वर्ष की अवधि में बसपा प्रमुख मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को दूसरी बार बसपा उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया है। इससे पूर्व 14 अप्रैल, 2017 को अंबेडकर जयंती पर मायावती ने आनंद कुमार को यह कहते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था कि वह पार्टी में निस्वार्थ भावना से ही कार्य करते रहेंगे और कभी सांसद, विधायक, मंत्री व मुख्यमंत्री आदि नहीं बनेंगे। इसी शर्त पर मायावती ने आनंद को उपाध्यक्ष नामित किया था लेकिन यह मनोनयन एक साल ही बना रह सका।

मई 2018 में किया पदमुक्त

आनंद करीब एक वर्ष ही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बने रहे कि सबको चौंकाते हुए मायावती ने 27 मई, 2018 को आनंद को उपाध्यक्ष पद से हटा दिया था। इसकी वजह बताते हुए कहा कि संगठन का कामकाज देखने के लिए आनंद कुमार को उपाध्यक्ष बनाया था, लेकिन पार्टी के भीतर भी कांग्रेस की तरह परिवारवाद की चर्चा शुरू हो गई है। लोगों ने आनंद कुमार की तर्ज पर अपने नाते-रिश्तेदारों को पदों पर रखने की सिफारिश शुरू कर दी है। तब मायावती ने कहा था कि पार्टी मूवमेंट से डिगती देख आनंद ने खुद पद छोडऩे की इच्छा जताई थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

बसपा में विश्वास का संकट

आनंद की नियुक्ति को लेकर लगभग एक वर्ष के भीतर ही अपना फैसला पलटने को मायावती की सियासी मजबूरी माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि लगातार चुनावी शिकस्त और भरोसेमंद सिपहसालार रहे स्वामी प्रसाद मौर्य, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, जयवीर सिंह, ब्रजेश पाठक जैसे लोगों की बगावत के बाद बसपा प्रमुख की स्थिति दूध के जले जैसी हो गई है। साठ से अधिक आयु की हो चुकीं मायावती के लिए संगठन संभालना भी मुश्किल होता जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि शायद ऐसे में मायावती ने अपनों पर ही भरोसा जताते हुए उनको पार्टी में बढ़ाने का काम शुरू किया है।

बसपा शासन में चलता था आनंद का सिक्का

कभी नोएडा में क्लर्क रहे आनंद कुमार की चर्चा मायावती की राजनीति चमकने के साथ चौतरफा फैली। वर्ष 2007-12 के बसपा शासनकाल में आनंद का दबदबा सर्वाधिक रहा। हालांकि राजनीति से उनका सीधा सरोकार नहीं रहता था परंतु बेहिसाब धन कमाने को लेकर तमाम आरोप लगते रहते थे। दर्जनों कंपनियों में भागेदारी के साथ आनंद को अपनी बड़ी बहन मायावती का दाहिना हाथ माना जाता था। हालांकि वर्ष 2017 में पहली बार बसपा उपाध्यक्ष बनने से पूर्व आनंद कुमार पार्टी के सार्वजनिक कार्यक्रमों से हमेशा दूर ही रहते थे। उनको न कभी पार्टी मंच पर बुलाया जाता था और न ही वह राजनीति को लेकर कोई बयान देते थे। उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति के बाद उन्हें मायावती के उत्तराधिकारी के तौर पर माना जाने लगा था।

स्टार प्रचारक रहे आकाश

सत्रहवीं लोकसभा चुनाव से थोड़ा पहले मायावती के भतीजे आकाश आनंद राजनीति में सक्रिय हुए और बसपा प्रमुख के साथ सार्वजनिक मंचों पर दिखायी देने लगे। लंदन के एक कॉलेज से एमबीए की डिग्री हासिल करने वाले आकाश बुआ की मदद के लिए सियासत में आगे आये। मायावती ने चुनाव में उन्हें बसपा का स्टार प्रचारक बना कर अपने साथ रखा। मायावती के भाई आनंद कुमार के पुत्र आकाश बसपा सुप्रीमो के जन्मदिन पर, सपा से गठबंधन वाले दिन, राजद नेता तेजस्वी यादव से मुलाकात के समय और अखिलेश व मायावती के बीच गठबंधन की वार्ताओं के दौरान सक्रिय रहे। मायावती की सोशल मीडिया में सक्रियता बढ़ाने का श्रेय भी आकाश को दिया जाता है। लोकसभा चुनाव में आकाश मायावती की छाया बनकर रहे थे।

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Posted By: Umesh Tiwari