लखनऊ, जेएनएन। उप्र अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) आयोग के अध्यक्ष बृजलाल 17 नवंबर को 65 वर्ष की आयु पूर्ण कर लेंगे। इसके साथ ही आयोग अध्यक्ष का उनका कार्यकाल पूरा हो जाएगा। शुक्रवार को उन्हें अंतिम कार्यदिवस पर आयोग के अधिकारियों व सदस्यों ने विदाई दी। बृजलाल ने इस अवसर पर अपने 19 माह के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं।

इंदिरा भवन स्थित आयोग कार्यालय में बृजलाल ने प्रेसवार्ता में बताया कि शासनादेश के अनुसार हर जिले के थानों में 23 फीसद एससी-एसटी थानेदारों की तैनाती होनी चाहिए। जब उन्होंने आयोग अध्यक्ष का पदभार संभाला था, तब थानों में केवल 10 प्रतिशत एससी-एसटी थानेदार तैनात थे। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीजीपी को नोटिस देने के साथ ही शासन को भी पत्र लिखा था। दो दिन पहले डीआइजी स्थापना ने आयोग के समक्ष वर्तमान स्थिति रखी। अब एससी-एसटी थानेदारों की तैनाती 19.2 फीसद हो गई है। अगले माह तक 23 फीसद तैनाती को पूरा करने का भरोसा दिलाया गया है।

बृजलाल ने कहा कि भाजपा शासनकाल में आयोग में शतप्रतिशत एससी-एसटी पदाधिकारियों व सदस्यों की तैनाती सुनिश्चित कराई गई। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन कर 25 अपराधों को बढ़ाए जाने व आर्थिक सहायता को चार गुना बढ़ाने की उन्होंने सराहना की। बृजलाल ने कहा कि वह भाजपा के कार्यकर्ता व सिपाही हैं। आगे पार्टी के लिए काम जारी रखेंगे।

6736 मामलों का कराया निस्तारण

बृजलाल ने बताया कि 18 अप्रैल 2018 को जब उन्होंने कार्यभार संभाला था, तब आयोग में 757 प्रकरण लंबित थे। उनके कार्यकाल में 5979 नये प्रकरण आए। उन्होंने 6736 प्रकरणों की सुनवाई पूरी कर उनका निस्तारण कराया। अब 448 मामले लंबित हैं। एससी-एसटी को आर्थिक सहायता के 244 प्रकरणों में 3.04 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पीडि़त परिवारों को दिलाई गई। 54 मामलों में आयोग ने सीधे संज्ञान लेकर जांच कराई। शिकायतों के निस्तारण में 0.89 फीसद मामले झूठे भी पाए गए।

Posted By: Umesh Tiwari

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