डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की बेरोजगारों को सलाह, नौकरी के चक्कर मत पड़ो; टैक्सी चलाओ और लड़का बच्चे संग रहो
Dy CM Brajesh Pathak: लखनऊ में 'भारत टैक्सी' सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में यह बयान दिया था। उनका कहना है ...और पढ़ें

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक
HighLights
'नौकरी के चक्कर में मत पड़ो, ई-रिक्शा चलाओ', ब्रजेश पाठक को विपक्षी दलों ने घेरा
लखनऊ में 'भारत टैक्सी' सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में दिया था यह बयान
डिजिटल डेस्क, लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वो बेरोजगारों को सलाह दे रहे हैं कि नौकरी-वौकरी के चक्कर में मत पड़ो। वह कहते नजर आ रहे हैं कि अपना चार घंटा ई-रिक्शा चलाओ और दोपहर में लड़के-बच्चों के साथ रहो।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने युवाओं को नौकरी की बजाय रिक्शा चलाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि रिक्शा ले लो और खूब पैसा बनाओ। उनके इस बयान पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने लखनऊ में 'भारत टैक्सी' सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में यह बयान दिया था। उनका कहना है कि ई-रिक्शा (या टैक्सी) ले लो। खूब चलाओ और खूब पैसा बनाओ।
सोशल मीडिया पर उनके बयान की आलोचना
ब्रजेश पाठक के इस बयान पर विपक्ष और जनता की तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर लोग उनके बयान की आलोचना कर रहे हैं और युवाओं के भविष्य के साथ इस तरह का मजाक न करने की सलाह दी है।
सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने साधा निशाना
सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने भी इसपर निशाना साधा है। डिप्टी सीएम के इस बयान पर समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने लिखा कि आजका युवा देश चलाएगा , रिक्शा चलाने का आपको शौक हो मैं उपहार में आपको भेज देता हूं, माननीय उप मुख्यमंत्री जी।
दरअसल उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक लखनऊ में भारत टैक्सी योजना की लॉन्चिंग के कार्यक्रम में ड्राइवर्स को आत्मनिर्भरता के साथ जीवनयापन के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। इस दौरान वह ड्राइवर्स के पेशे की तारीफ कर रहे थे। उन्होंने कहा था "नौकरी के चक्कर में मत पड़ो, चार घंटा अपना टेंपो चलाओ और दोपहर में लड़के-बच्चे के साथ रहो।
दूसरों की नौकरी करोगे तो क्या बच्चों के साथ बैठ पाओगे दो घंटा। आखिरी की सवारी घर के पास वाली लो। दो बाज गया, खाना खाने का समय हो गया तो अपने घर के पास वाली सवारी ली। दो घंटा बच्चों के साथ खाये-सोए-आराम किए, फिर निकल गए दस बजे तक के लिए. रुपया अपने घर का।
