लखनऊ, जेएनएन। केजीएमयू में मेडिकल की पढ़ाई में किताबों का धंधा चल रहा है। यहां एमबीबीएस के नए छात्रों को हॉस्टल में दुकान लगाकर महंगी किताबें थमा दी गईं। वहीं अब शिक्षक संबंधित प्रकाशन की किताबों पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में मेडिकल छात्रों में असमंजस कायम है।

केजीएमयू में एमबीबीएस की 250 सीटें हैं। सभी पर विद्यार्थियों ने दाखिला ले लिया। एक अगस्त से शैक्षिक सत्र की शुरुआत हुई। वहीं पहली बार एक माह का फाउंडेशन कोर्स कराया गया, जबकि कक्षाएं एक सितंबर से चलीं। फाउंडेशन कोर्स के दरम्यान ही विद्यार्थियों को शिक्षकों द्वारा कोर्स की लिस्ट थमा दी गई। उधर, हॉस्टल के अंदर प्राइवेट विक्रेता की दुकान भी लगवा दी गई। नाम न छापने की शर्त पर छात्रों ने बताया कि अगस्त के अंतिम सप्ताह में दुकानदार पुस्तकों के सेट लेकर हॉस्टल के अंदर आया। वहीं सभी छात्रों को पढ़ाई के लिए पुस्तकें खरीदने का फरमान भी भेजा गया।

15 लाख की पुस्तकों का धंधा

विद्यार्थियों के मुताबिक, प्रथम वर्ष में बायोकेमिस्ट्री, एनॉटमी व फिजियोलॉजी विषय हैं। इनकी पुस्तकों के सेट हॉस्टल में दुकानदार लेकर आया। एक सेट में 13 से 14 किताबें मिलीं। दुकानदार ने प्रति सेट लगभग छह हजार रुपये वसूले। इस दौरान जो छात्र हॉस्टल में नहीं रहते थे, उन्हें भी बुलावाकर पुस्तकें खरीदवाई गईं। एकाध को छोड़कर अधिकतर ने संबंधित दुकानदार से पुस्तकों का सेट खरीदा। ऐसे में लगभग 15 लाख की किताबें बिकीं। वहीं बाहर यह किताबें सस्ती हैं।

कक्षा में पुस्तकों पर सवाल

हॉस्टल से पुस्तक खरीदकर विद्यार्थी कक्षाओं में पहुंचे। वहीं क्लास में पढ़ाने वाले संबंधित विभागों के कुछ शिक्षकों ने पुस्तकों पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने दूसरे प्रकाशन की पुस्तकों को बेहतर बता दिया। ऐसे में छात्र पढ़ाई को लेकर असमंजस में हैं।

कैसे मिली हॉस्टल में अनुमति

हॉस्टल के अंदर बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित है। वहीं केजीएमयू में बाकायदा हॉस्टल में किताबें बेची गईं। इसकी किसने अनुमति दी। छात्रों को अलग-अलग प्रकाशन की पुस्तक को लेकर क्यूं गुमराह किया जा रहा है। इस संदर्भ में प्रॉक्टर प्रो. आरएएस कुशवाहा ने पुस्तक विक्रेता को हॉस्टल में अनुमति देने से इन्कार किया है। इस मसले पर वार्डेन से जवाब-तलब करने का दावा किया।

 

Posted By: Anurag Gupta

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