लखनऊ [अजय जायसवाल]। कारण चाहे जो हो लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार भी पूर्व की सपा और बसपा सरकार की तरह समय से नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत) चुनाव कराने में नाकाम साबित हो रही है। सरकार की हीला-हवाली से अदालती आदेश के बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग अपने सांविधानिक दायित्व नहीं निभा पा रहा है। ऐसे में फिर निकायों की कमान जनप्रतिनिधियों के बजाय नौकरशाहों के हाथ में होगी। 

नगरीय निकायों का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से छह माह की समयावधि में निकायों का चुनाव कराने का सांविधानिक दायित्व राज्य निर्वाचन आयोग का है। आयोग की तैयारी भी थी लेकिन राज्य सरकार द्वारा निकायों के परिसीमन से लेकर रैपिड सर्वे व पदों के आरक्षण की प्रक्रिया न पूरी करने से आयोग अधिसूचना नहीं कर पा रहा है। उल्लेखनीय है पांच वर्ष पहले मौजूदा निकायों के चुनाव के लिए आयोग ने 25 मई को अधिसूचना जारी कर 13 जुलाई को उनके गठन की अधिसूचना कर दी थी। राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल का कहना है कि अधिसूचना न हो पाने से निकायों का कार्यकाल खत्म होने से पहले अब चुनाव करा पाना संभव नहीं है। चुनाव कराने के लिए लगभग 35 दिन चाहिए होते हैं। अब सितंबर-अक्टूबर में जब चुनाव कराए जाएंगे तब तक ज्यादातर निकायों का कार्यकाल खत्म हो चुका होगा।
पूर्व की सपा व बसपा सरकार के दौरान भी निकायों के चुनाव समय से नहीं हुए थे। तत्कालीन सपा सरकार के दौरान जो चुनाव वर्ष 2005 में होने थे वह 2006 में हुए थे। इसी तरह तत्कालीन बसपा सरकार के दौरान वर्ष 2011 में होने वाले निकाय चुनाव 2012 में तब हुए थे जब कोर्ट ने समय से चुनाव न कराने पर कड़ा रुख अपनाया था।

नहीं माना सरकार का आदेश
नगरीय निकायों का पांच वर्ष का कार्यकाल एक साथ समाप्त हो इसके लिए राज्य सरकार ने 6 जुलाई 2012 को शासनादेश जारी कर निकायों के गठन की अधिसूचना के एक सप्ताह में अनिवार्य रूप से सभी महापौर, अध्यक्ष, पार्षद व सदस्य के शपथ के साथ ही एक माह में निकायों की प्रथम बैठक (अधिवेशन) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे लेकिन, सभी ने शासनादेश नहीं माना। 15 जुलाई से लेकर 28 नवंबर तक विभिन्न निकायों का कार्यकाल है।

324 निकायों का पांच वर्ष का कार्यकाल जहां 31 जुलाई तक खत्म हो रहा है वहीं 294 निकायों का कार्यकाल पहली अगस्त से 31 अगस्त के दरमियान समाप्त होगा। नगर पालिका परिषद मथुरा व नगर पंचायत महावन का पहली सितंबर, चिरगांव पालिका परिषद का 14 सितंबर, मछली शहर पंचायत का 11 अक्टूबर, मिलक परिषद का 6 नवंबर व कमालगंज नगर पंचायत का कार्यकाल 28 नवंबर तक है। बाद में चुनाव होने के कारण रेनुकूट, सिवालखास, कलीनगर व सुबेहा नगर पंचायत का कार्यकाल भी सात से 22 मार्च 2013 के बीच खत्म होगा।

समिति के परामर्श पर काम करेंगे अफसर
नगरीय निकाय सदन या बोर्ड की पहली बैठक से पांच वर्ष की अवधि गुजरने के साथ ही चुने हुए प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। ऐसे में कोर्ट के संबंधित आदेश पर 17 दिसंबर 2011 को जारी शासनादेश के तहत प्रशासक के बजाय नगर निगमों के प्रबंधन के लिए कार्यकारिणी समिति के पर्यवेक्षण में नगर आयुक्त तथा नगर पालिका परिषद-नगर पंचायत के प्रबंधन के लिए समिति के पर्यवेक्षण में अधिशासी अधिकारी काम करेंगे। कार्यकारिणी समिति बहुमत के द्वारा नगर आयुक्त या अधिशासी अधिकारी को परामर्श दे सकेगी। कार्यकारिणी समिति के सदस्यों को किसी तरह का भत्ता आदि नहीं मिलेगा। चूंकि नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों में कार्यकारिणी समिति नहीं होती है इसलिए उसका बोर्ड ही समिति की भूमिका रहेगा।  

Posted By: Ashish Mishra

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