विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यूपी विधानसभा चुनाव के लिए BJP ने पड़ोसी राज्यों में भी सजाई फील्डिंग, विपक्ष का चक्रव्यूह तोड़ने के लिए बनाई रणनीति

Published: Thu, 16 Apr 2026 10:21 PM (IST)

भाजपा पड़ोसी राज्यों में मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति के माध्यम से उत्तर प्रदेश की राजनीति को प्रभावित करने की रणनीति अपना रही है।

मिशन यूपी के लिए भाजपा ने पड़ोसी राज्यों में भी सजाई फील्डिंग

 मिशन यूपी के लिए भाजपा ने पड़ोसी राज्यों में भी सजाई फील्डिंग

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। भाजपा देर से ही सही, लेकिन बहुत दूर की सोचकर निर्णय लेती है। बिहार में कोइरी समाज के सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने ओबीसी कार्ड मजबूत करते हुए यूपी में अखिलेश यादव के पीडीए की चाल रोकने का भी प्रयास किया है।

पड़ोसी राज्यों में मुख्यमंत्रियों के जरिए भाजपा ने ऐसा जातीय गुलदस्ता सजाया है, जिसका असर 2027 में यूपी के विधानसभा चुनाव में नजर आएगा। भाजपा ने हाल में बिहार में सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाकर पूर्वांचल तक साधने का दांव चला है। पूर्वांचल में कोइरी समाज की बड़ी संख्या है, जहां कई जिलों की सीमाएं बिहार तक पहुंचती हैं। उत्तर प्रदेश में सैनी समाज को भी कोइरी समाज का समतुल्य मानते हैं।

भाजपा ने आठ फरवरी 2025 को नई दिल्ली में रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर जहां महिला समीकरण साधा, वहीं गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ समेत पश्चिम के जिलों के वैश्य वोटों की बड़ी संख्या के बीच अपनेपन का संदेश दिया। हरियाणा में भाजपा ने पुराने जातीय समीकरणों को बदलते हुए 12 मार्च 2024 को नायब सिंह सैनी को सीएम की कुर्सी पर बिठाया।

हरियाणा की सीमा से सटे सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर एवं बागपत से लेकर संभल तक सैनी वोटों की बड़ी संख्या है। इन क्षेत्रों में नायब सिंह की जनसभाएं लगती रही हैं। मध्य प्रदेश में 13 दिसंबर 2023 को सीएम बने मोहन यादव के जरिए भाजपा ने सपा के जातीय चक्रव्यूह को भेदने का प्रयास किया।

सपा के मजबूत गढ़ पर असर पड़े या न पड़े, लेकिन मोहन के जरिए भाजपा ने ओबीसी की सबसे मजबूत जातियों में शामिल यादव वोटों के बीच बड़ा संदेश तो दिया ही है। पिछले लोकसभा चुनाव में मोहन यादव की यादव बाहुल्य जिलों इटावा, मैनपुरी, एटा, शिकोहाबाद, कन्नौज से लेकर आजमगढ़ तक चुनाव प्रचार में मांग रही।

राजस्थान में भजनलाल शर्मा, नई दिल्ली में रेखा गुप्ता, उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी और उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ सवर्ण समाज के हैं, जिनका आसपास के राज्यों में जातीय कनेक्ट भी है। पड़ोसी राज्यों में पार्टी ने तीन ओबीसी एवं तीन सवर्ण समाज के चेहरों को सीएम की कुर्सी देकर जातीय समीकरण दुरुस्त रखने का प्रयास किया है।

यह भी पढ़ें- यूपी पुलिस का ‘फॉरेंसिक वार’, 300 क्राइम सीन एक्सपर्ट्स तैयार; अब अपराधी के हर कदम पर होगी विज्ञान की नजर