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यूपी में BJP-RSS का महामंथन, बीएल संतोष, विनोद तावड़े और अरुण कुमार तय करेंगे मिशन-2027 का नया एजेंडा

Published: Wed, 16 Sep 2026 06:35 AM (IST)

भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर प्रदेश में मिशन-2027 की रणनीति तय करने के लिए तीन स्थानों पर महामंथन कर ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. मिशन-2027 के लिए भाजपा-संघ की तीन स्थानों पर बैठकें।

  2. आंतरिक विरोध, जनसंख्या असंतुलन, हिंदुत्व पर होगी चर्चा।

  3. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर जोर, मथुरा-वृंदावन पर रणनीति।

आकार संतोष शुक्ल, लखनऊ। भाजपा ने राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष व प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े के यूपी प्रवास और दौरों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ तीन स्थानों पर बैठकों की रूपरेखा बनाई है। संघ और भाजपा के बीच समन्वय बनाने का दायित्व निभाने वाले राष्ट्रीय सह सरकार्यवाह अरुण कुमार इन बैठकों में रहेंगे। सबसे पहले काशी व गोरक्ष क्षेत्र की बैठक होगी, जिसके बाद अवध-कानपुर और ब्रज-पश्चिम क्षेत्र पर मंथन होगा।

भाजपा के सामने जहां जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं व संगठन के बीच आंतरिक विरोध खत्म करने की चुनौती है, वहीं धार्मिक कार्यक्रमों, जनसंख्या असंतुलन, घुसपैठ, हिंदुत्व, पीडीए व ध्रुवीकरण समेत कई विषयों पर पार्टी नए सिरे से एजेंडा तय करेगी। बैठकों में संघ की ओर से विभाग, प्रांत व क्षेत्र प्रचारक भी रहेंगे जबकि भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह और संबंधित क्षेत्रीय अध्यक्ष शामिल होंगे।

भाजपा मिशन-2027 को लेकर कई स्तरों पर एक साथ तैयारी कर रही है। जहां पार्टी छह माह तक संत रविदास जयंती समरसता अभियान और इस बीच एक माह के सेवा संकल्प अभियान पर फोकस कर रही, वहीं, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, बीएल संतोष, विनोद तावड़े, सह प्रदेश प्रभारी जगदीश ईश्वर पटेल लखनऊ और कानपुर को मथ चुके हैं।

17 और 18 सितंबर को तावड़े गोरखपुर क्षेत्र में रहेंगे। अब संघ और भाजपा के बीच समन्वय बैठकें भी साथ चलेंगी। रणनीतिकारों का कहना है कि चुनाव से पहले संघ और भाजपा के शीर्ष पदाधिकारी साथ बैठकर अनुकूल वातावरण बनाने का प्रयास करेंगे। कई मंत्री और विधायक अपनी ही सरकार में अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाकर धरने पर बैठ चुके हैं।

कई नारे पुराने पड़ रहे हैं, जबकि सपा के पीडीए को लेकर राजनीति में हलचल है। कई विधायकों, मंत्रियों व सांसदों को लेकर संघ के पास नकारात्मक फीडबैक है, जिसे समन्वय बैठकों में उठाया जाएगा। पश्चिम एवं काशी क्षेत्र में 71-71, ब्रज में 65, अवध में 82, कानपुर में 52 व गोरखपुर क्षेत्र में 62 विधान सभा सीटें हैं, जहां की ज्यादातर सर्वे रिपोर्ट भाजपा की धड़कन बढ़ा रही है।

अयोध्या और काशी के बाद अब पार्टी मथुरा-वृंदावन और संभल से धार्मिक ज्वार उठाने की रणनीति पर बढ़ रही है। वहीं जातिवाद, क्षेत्रवाद, मतांतरण व ध्रुवीकरण के साइड इफेक्ट से बचने के लिए संघ ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाने की दृष्टि दी है।

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