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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में उत्तर प्रदेश की अहम भूमिका, Nitin Nabin निर्विरोध अध्यक्ष

By Digital Desk Edited By: Dharmendra Pandey
Published: Mon, 19 Jan 2026 05:10 PM (IST)

BJP President Election: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में उत्तर प्रदेश की बड़ी भूमिका है। नामांकन में जहां मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ माैजूद थे।

नितिन नवीन--- मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ

नितिन नवीन--- मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ

HighLights

  1. राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए उत्तर प्रदेश के 20 प्रस्तावक

  2. नामांकन के समय माैजूद थे सीएम याेगी आदित्यनाथ

डिजिटल डेस्क, लखनऊ : नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रहे नितिन नवीन का भाजपा का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय है। सोमवार को उनके खिलाफ किसी में भी नामांकन नहीं किया। उनके इस पद पर काबिज होने में उत्तर प्रदेश के भी नेताओं की बड़ी भूमिका है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नितिन नवीन ने नामांकन दाखिल कर दिया है। इस दौरान भाजपा के प्रमुख नेता अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, जेपी नड्डा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मौजूद थे।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में उत्तर प्रदेश की बड़ी भूमिका है। नामांकन में जहां मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ माैजूद थे। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए उत्तर प्रदेश के 20 प्रस्तावक हैं। इनमें दस प्रदेश परिषद के सदस्य और दस राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं।

उत्तर प्रदेश के 20 प्रस्तावकाें में सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यसभा सदस्य केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, भाजपा उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी, विधायक मांट राजेश चौधरी, सांसद नाेएडा डॉ महेश शर्मा, पूर्व सांसद अमेठी स्मृति ईरानी, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और सांसद बांसगांव कमलेश पासवान शामिल हैं।

कैसे होता है भाजपा अध्यक्ष का चुनाव

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पार्टी की राष्ट्रीय परिषद और राज्य परिषदों के प्रतिनिधियों का निर्वाचक मंडल करता है। इस पूरे प्रकिया की देखरेख पार्टी के राष्ट्रीय प्रतिवेदक करते हैं। किसी राज्य के निर्वाचक मंडल के कोई भी 20 सदस्य संयुक्त रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए ऐसे व्यक्ति का नाम प्रस्तावित कर सकते हैं जो चार कार्यकाल तक पार्टी का सक्रिय सदस्य रहा हो और उससकी सदस्यता के 15 साल हो चुके हों। ऐसा संयुक्त प्रस्ताव कम-से-कम पांच ऐसे राज्यों से आना चाहिए, जहां राष्ट्रीय परिषद के लिए चुनाव हो चुके हों।