लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव विजय रथ लेकर निकले हैं तो भारतीय जनता पार्टी वह रास्ता बनाने में जुटी है कि हर जाति-वर्ग के मतदाता तक पहुंच कैसे आसान बनाई जाए। क्षेत्रवार आकलन कर भारतीय जनता पार्टी ने 32 जाति-वर्ग चिह्नित किए हैं। अब इनके सामाजिक सम्मेलन आयोजित कर बताया जाएगा मोदी-योगी सरकार की 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' की नीति का किस वर्ग को क्या लाभ मिला।

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अपनी जीत दोहराने के लिए भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकारों ने महीन रणनीति बनाई है। 350 से अधिक सीटों का लक्ष्य बनाकर मैदान में उतरा सत्ताधारी दल हर वर्ग और क्षेत्र से वोट जुटाना चाहता है। दलित और पिछड़ा वर्ग पर खास नजर है। चूंकि, सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी इन्हीं वर्गों से ज्यादा हैं, इसलिए पार्टी लाभार्थी वोटबैंक के रूप में इन्हें अपने साथ मजबूती से जोड़े रखना चाहती है, ताकि जाति आधारित छोटे दलों का कोई सियासी दांव राह में रोड़ा न बन सके।

केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के सहारे दलित, पिछड़े, अनुसूचित जनजाति के साथ ही ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश हुई। इसी क्रम में अब हरदोई विधायक नितिन अग्रवाल को विधानसभा उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी वैश्य समाज को संदेश देना चाहती है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल सात नए सांसदों की जन आशीर्वाद यात्रा कई विधानसभा क्षेत्रों में निकालकर उनके समाज को जोड़ने का प्रयास किया गया। अब इसी सिलिसले को सामाजिक सम्मेलनों के सहारे आगे बढ़ाया जाएगा।

17 अक्टूबर से भाजपा सामाजिक सम्मेलन शुरू करने जा रही है। इसके लिए 32 जाति-वर्गों को चिह्नित किया गया है। रूपरेखा यह बनी है कि दो विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर एक सम्मेलन किया जाएगा। चूंकि, हर विधानसभा में से अधिक वर्गों के मतदाताओं की संख्या ठीक-ठाक होगी, इसलिए संबंधित क्षेत्र में वर्ग की आबादी के अनुसार सम्मेलनों की संख्या तय की जाएगी। इन सामाजिक सम्मेलनों के अलावा युवा, महिला, किसान, व्यापारी और प्रबुद्ध वर्ग के लिए अलग-अलग कार्यक्रम समानांतर चलाए जाएंगे। सौ दिन के लिए सौ कार्यक्रम भी जल्द ही तय होने जा रहे हैं।

Edited By: Umesh Tiwari