राज्य ब्यूरो, लखनऊ। फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाना अप्रत्याशित जरूर है, लेकिन इसके जरिये भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। उनकी ताजपोशी के पीछे दूरदर्शिता और सोची-समझी रणनीति है। उनकी तैनाती के जरिये जहां बिहार में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर भाजपा की नजर होगी, वहीं पूर्वांचल में भी पिछड़ों को साधने की मुहिम को आगे बढ़ाने का इरादा है।

बिहार राजनीति में जातियों की लड़ाई की एक अद्भुत प्रयोगशाला रहा है। खासतौर पर वहां की सियासत में पिछड़ी जातियों की अहम भूमिका रही है। बिहार से ही सटा पूर्वांचल है। पूर्वांचल के कई जिलों में पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखने वाले लोनिया चौहान बिरादरी की अच्छी खासी आबादी है। फागू भी इसी बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। अगले वर्ष बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। खत्री बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले लालजी टंडन की वहां इस लिहाज से सीमित उपयोगिता है। ऐसे में पिछड़ा वर्ग के एक व्यक्ति को बिहार राजभवन की बागडोर सौंपकर भाजपा की ओर से पिछड़ी जातियों को एक सशक्त संदेश देने की कोशिश की गई है।

भाजपा के लिए यह इसलिए भी जरूरी था क्योंकि सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में उसे घोसी, आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर समेत पूर्वांचल की कई सीटों पर झटका लगा। फागू पूर्वांचल में लोनिया चौहान बिरादरी के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं। इसी वजह से उन्हें उप्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था। अब उन्हें पड़ोसी राज्य का राज्यपाल बनाकर पूर्वी उप्र में उपेक्षित एक पिछड़ी जाति को महत्व देने के साथ भाजपा ने पूर्वांचल में पिछड़ों पर अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास किया है।

एक और नजरिये से देखें तो यह निर्णय पिछड़ी जातियों को सिलसिलेवार तरीके से अपने पाले में करने की भाजपा की मुहिम की एक और कड़ी है। वर्तमान में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह को पूर्व में मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने कभी पिछड़ों में शामिल लोध जाति को अपने पाले में किया था। उसके बाद विनय कटियार, ओम प्रकाश सिंह जैसे नेताओं को महत्व देकर उसने कुर्मी बिरादरी को तवज्जो दी। पिछले विधानसभा चुनाव से पहले मौर्य बिरादरी के केशव प्रसाद मौर्य को पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और फिर उप मुख्यमंत्री बनाकर उसने इस जाति से रिश्ते मजबूत किये। हाल ही में कुर्मी बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले स्वतंत्र देव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर उसने पूर्वांचल और बुंदेलखंड में पिछड़ों को साधने का काम किया। अब राज्यपाल पद पर फागू की नियुक्ति से पिछड़ों को और अहमियत दी गई है।

उप्र से आठवें राज्यपाल बने फागू

फागू चौहान को राज्यपाल बनाये जाने के बाद वर्तमान में उत्तर प्रदेश की आठ शख्सियतों को प्रदेश के इस सर्वोच्च सांविधानिक पद पर नियुक्त किया जा चुका है। अभी तक देश के सात राजभवनों के अध्यासी उप्र के निवासी हैं। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह राजस्थान, लालजी टंडन अभी तक बिहार और अब मध्य प्रदेश, सत्यपाल मलिक जम्मू एवं कश्मीर, बेबी रानी मौर्य उत्तराखंड और बीडी मिश्रा अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल हैं। केशरी नाथ त्रिपाठी पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं। उनका कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। हाल ही में कलराज मिश्र को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

अब 13 सीटों पर होंगे उपचुनाव

फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाये जाने के बाद प्रदेश में 13 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होंगे। फागू मऊ के विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं। राज्यपाल नियुक्त किये जाने के नाते अब उन्हें विधायक पद से इस्तीफा देना होगा। ऐसे में प्रदेश में अब 13 विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव होंगे। 

Posted By: Umesh Tiwari

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